सीतामढ़ी। सीतामढ़ी रेलवे स्टेशन के प्लेटाफार्म पर कैंटीन संचालक की चाकू गोदकर हत्या से सनसनी फैल गई है। कैंटीन के जिस कमरे में संचालक सोए हुए थे बाहर से उसकी खिड़की खुली हुई थी। कैंटीन के एक तरफ आरपीएफ तो दूसरी तरफ जीआरपी थाना है। प्लेटफार्म पर पुख्ता सुरक्षा इंतजामों का दावा करने वाले आरपीएफ व जीआरपी के अधिकारी इस घटना के बाद बैकफुट पर हैं। मंगलवार तड़के तीन-साढ़े तीन बजे के आस-पास हत्या की वारदात हुई, लेकिन दिनभर तफ्तीश व तमाम मशक्कत के बावजूद जांच अधिकारी किसी पुख्ता नतीजे पर नहीं पहुंच पाए। खोजी कुत्ता भी रेलवे स्टेशन से सात-आठ सौ मीटर लखनदेई नदी किनारे तक गया और रूक गया। इसी इलाके में अरुण सिंह का मकान भी है। जांच अधिकारियों का कहना है कि वजह जानने की कोशिश की जा रही है। दो-तीन बिदुओं पर जांच चल रही है। पारिवारिक कलह-क्लेश, कैंटीन विवाद व जमीन-जायदाद को लेकर भी जांच हो रही है। बहरहाल, प्लेटफार्म पर आरपीएफ व जीआरपी की काफी संख्या में सुरक्षाकर्मी रात-दिन की गश्ती में रहते हैं। रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर हर तरफ से 32 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। बावजूद कैंटीन संचालक की इस तरह से हत्या की बात किसी के गले नहीं उतर रही है। 60 वर्षों से कैंटीन व्यवसाय पर था एकाधिकार, फिर अक्टूबर माह में होने वाला था टेंडर शिवहर जिले के पुरनहिया थाना क्षेत्र के धनकौल गांव के रहने वाले अरुण कुमार सिंह और उनके चाचा लगभग 60 वर्षों से ज्यादा समय से रेलवे स्टेशन पर काबिज थे। पहले उनके चाचा रामदास प्रसाद सिंह के द्वारा किया जाता था, जिनकी मृत्यु के बाद अरुण सिंह संचालन करने लगे। इतने वर्षों लगातार कैंटीन का संचालन करते रहने से एक तरह से कैंटीन व्यवसाय पर इनका एकाधिकार सा माना जाने लगा था। जिसके चलते उनके रहते फिर किसी को कैंटीन का टेंडर मिलने की संभावना कम ही थी। अक्टूबर महीने में पुन: कैंटीन का टेंडर होने वाला भी था। हो सकता है इस वजह से भी उनको रास्ते से हटाने की कोशिश की गई हो। परिवार में तीन बेटियां, पत्नी की वर्षों पूर्व कैंसर से हुई मौत

उनके परिवार में तीन बेटियां हैं, बेटा नहीं है। पांच-साल साल पहले कैंसर की बीमारी से उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई। तीनों बेटियों में सबसे बड़ी ममता, बीच वाली का समता व सबसे छोटी नंदनी की शादी हो चुकी है। पटना में नंदनी तो रीगा में ममता व सीतामढ़ी में समता की शादी हुई है। शहर से सटे बसवरिया टोला कमला गार्डन (मेहसौल नया टोला) में उनका मकान है। सबसे छोटी नंदनी जो पटना में रहती थी वह अपने पति को छोड़कर उसी मकान में तीन-चार साल से रह रही है। वह मानसिक रूप से बीमार भी रहती है। इसी बेटी से आजिज आकर अरुण सिंह अपने मकान में नहीं रहकर तीन-चार महीने से कैंटीन में ही रह रहे थे। दिमागी संतुलन ठीक नहीं रहने से नंदनी को इस बात का भी एहसास नहीं हो रहा कि उसके पिता की हत्या हो चुकी है। सबसे बड़ी बेटी ममता पति राजेश कुमार बसवरिया में ही अपना मकान बनाकर रहती है। ममता से अरुण कुमार सिंह का अनबन चल रहा था, लेकिन उनकी मौत के बाद दाह-संस्कार ममता के यहां ही हो रहा है। ममता के पुत्र ने मुखाग्नि दी है। जमीन-जायदाद व बैंक बैलेंस के बारे में भी पता लगा रही पुलिस

धनकौल में भी घर-द्वार व जमीन-जायदाद काफी है। उनका खाद्यान्न व सब्जी मंडी का उनके परिवार का बड़ा बाजार है। इस मंडी से सैकड़ों ट्रक खाद्यान्न का कारोबार होता है। घर-द्वार से काफी संपन्न परिवार है उनका। अरुण सिंह के छोटे भाई दिग्विजय सिंह वर्ष 2001 में मुखिया भी रहे थे। इधर, सीतामढ़ी शहर में भी दो-ढाई कट्ठे की जमीन पर खपड़ैलनुमा मकान है। इस जमीन व मकान का मौजूदा बाजार भाव तकरीबन 60 से 70 लाख रुपये आंका जा रहा है। अरुण सिंह की पैतृक संपत्ति व वर्षों की कमाई से पास में बैंक बैलेंस भी अच्छा-खासा हो सकता है। हालांकि, उसके बारे में पुलिस का कहना है कि इसकी जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। जानकारों का स्पष्ट मानना है कि पुत्र के नहीं होने व पत्नी की मृत्यु के साथ तीनों बेटियों की शादी के बाद जमीन-जायदाद पर लोगों की नजर हो सकती है। उधर, रेलवे स्टेशन पर कैंटीन की अच्छी कमाई होने की संभावनाओं को लेकर भी दुश्मन पीछे लगे हो सकते हैं। कैंटीन में कुछ दिन पहले चोरी भी हुई थी

घटना की जानकारी मिलने पर स्टेशन पहुंचे अल्पसंख्यक एकता मंच के मुतुर्जा अंसारी का कहना था कि कैंटीन को हड़पने या जमीन-जायदाद की नीयत से हत्या की गई हो सकती है। अरुण की दो बेटियों ममता व समता का कहना था कि उनके पिता की किसी से अदावत नहीं थी। हाल में कोई शख्स उनसे नजदीकी बढ़ाने लगा था जिससे उनकी अच्छी ट्यूनिग हो गई थी। साथ उठना-बैठना होता था। हर पल उनके साथ वह आदमी देखा जाता था। कुछ दिन पहले कैंटीन में चोरी भी हुई थी। पुलिस ने चोरी की सूचना से इन्कार किया है। अपराधियों ने कैंटीन में काम करने वाली सूर्यकला से छीना मोबाइल

कैंटीन में 2006 से काम करने वाली सीतामढ़ी की सूर्यकला देवी का कहना है खट-पट की अवाज सुनकर उनकी नींद खुली तो दो लोग सामने थे। हल्ला करने की कोशिश करने पर उनका मोबाइल छीन लिया और डरा-धमकाकर मारपीट करने पर उतारु हो गए। उसके बाद दोनों कैंटीन से निकलकर प्लेटफार्म की ओर तेजी से भागे। एक अपराधी के बारे में पता चला कि वह प्लेटफार्म संख्या 3 की ओर तो दूसरा दक्षिण दिशा में भागा।

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