मोतिहारी। लंबी प्रतीक्षा के बाद सरकारी स्तर पर महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए उपलब्ध कराई गई भूमि पर विश्वविद्यालय के निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। पहले चरण में 30 एवं दूसरे चरण में 102 एकड़ भूमि मिलने के बाद अब लग रहा है कि जल्द ही विश्वविद्यालय अपनी भूमि पर नया स्वरूप में सामने आएगा। विश्वविद्यालय के निर्माण की हर प्रकार की बाधाएं समाप्त हो गई है। 102 एकड़ भूमि की पैमाइश व दाखिल खारिज की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। विभागीय स्तर पर डीपीआर की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही अपनी भूमि पर हर प्रकार के संसाधनों से युक्त विश्वविद्यालय नए स्वरूप में सामने होगा। बताया गया कि भूमि अधिग्रहण के बाद कोरोना से हर प्रकार के कार्यों पर ब्रेक लगा दिया था। अब धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होने के साथ विश्वविद्यालय के निर्माण की उम्मीद भी जग गई है। आठ विभागों की पढ़ाई अपनी भूमि पर प्रारंभ

विश्वविद्यालय के भवन निर्माण की भले ही अभी नींव नहीं पड़ी हो, पर प्रबंधन ने अपनी भूमि पर आठ विभागों का अध्ययन कार्य प्रारंभ कर दिया है। बता दें कि भूमि अधिग्रहण के क्रम में एक स्कूल का भवन भी विश्वविद्यालय की अधिगृहित भूमि में प्राप्त हुआ था। इस भवन को पुर्ननिर्माण कराकर पढ़ाई के लिए तैयार किया गया। साथ ही यहां आठ विभागों की पढ़ाई प्रारंभ कर दी गई। कैंपस भले ही छोटा है, पर अपनी भूमि पर केविवि का स्वरूप जरूर नया है। हालांकि छात्र-छात्राओं की बढ़ रही संख्या को देखते हुए जिला स्कूल स्थित अस्थायी कैंपस के अलावा भी बलुआ टाल में भाड़े का भवन लेकर पढ़ाई की जा रही है। प्रशासनिक भवन भी रघुनाथपुर में भाड़े के भवन में संचालित है। कुलपति संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि फिलहाल निर्माण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। लेकिन कैंपस को स्वरूप लेने में थोड़ा वक्त लगेगा। इस स्थिति में अगर जरूरत हुई तो अन्य भवन भी भाड़े पर लेकर पढ़ाई की जाएगी।

बापू के रोजगारपरक शिक्षा के सपने को किया जा रहा पूरा

बापू कर कर्मभूमि होने व बापू के नाम पर विश्वविद्यालय का नाम होना अपने आप में एक संदेश देता है। अगर शिक्षा को लेकर देखा जाए तो विश्वविद्यालय प्रबंधन का प्रयास है कि बापू ने जो रोजगारपरक शिक्षा के सपने चंपारण में देखे थे, उसे पूरा करने की दिशा में सार्थक प्रयास हो। कई प्रकार के कोर्स के माध्यम से छात्र-छात्राओं को इस लायक बनाया जा रहा है कि वे आत्मनिर्भर बन सकें।

शैक्षणिक कार्यों के प्रति दिखती है सजगता विश्वविद्यालय प्रबंधन अपने स्थापना काल से ही शैक्षणिक गतिविधियों के साथ अनुशासन को सर्वोपरि रखा। यहीं कारण है कि पढ़ाई का स्तर दिनोदिन ठीक होता चला गया। यहां अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं का कैंपस सलेक्शन भी होता रहा है। छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ती गई पढ़ाई के लिए भवन की संख्या भी बढ़ी। बताया गया कि विश्वविद्यालय में सभी शिक्षकों के पद भर लिए गए हैं। कुलपति ने साफ तौर पर कहा कि विश्वविद्यालय को कम समय में अगर बेहतर पहचान मिली है तो वह है यहां की बेहतर व्यवस्था। यहीं कारण है कि बिहार से बाहर के छात्र-छात्राएं भी सीमित संसाधनों के बीच यहां आकर पढ़ाई में दिलचस्पी दिखाई है। वर्जन :

विश्वविद्यालय को 132 एकड़ भूमि मिल चुकी है। विश्वविद्यालय के अपनी भूमि पर सुंदर कैंपस के निर्माण को लेकर डीपीआर निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। विश्वविद्यालय में शिक्षकों के पद भर लिए गए हैं। रोजगारपरक शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आवश्यकता पड़ने पर और भवन को लेकर अध्ययन कार्य संचालित किया जाएगा। प्रो. संजीव कुमार शर्मा, कुलपति, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय

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