तरनतारन, [धर्मबीर सिंह मल्हार]। पंजाब के स्‍वास्‍थ्‍य विभाग में गजब का फर्जीवाड़ा सामने आया है। छह फर्जी कर्मचारियों को मृत घोषित कर दिया गया और उनके फर्जी आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी दे दी गई। इतना ही नहीं उनको एक-एक लाख रुपये के चेक भी दे दिए गए। यह फर्जीवाड़ा अलग-अलग अस्पतालों में अनुकंपा के आधार पर नौकरी में हुआ है। छह दर्जा चार कर्मचारियों को मरा हुआ बता कर उनके जाली आश्रितों को नौकरी और मुआवजा दे दिया गया। सिविल सर्जन कार्यालय में यह फर्जीवाड़ा वर्ष 2019-2020 के दौरान हुआ।

स्वास्थ्य विभाग में अनुकंपा के आधार पर नौकरी में बड़ा फर्जीवाड़ा आया सामने

हैरानी की बात यह है कि सेहत विभाग ने रिकार्ड में जिन लोगों को मरा हुआ बताया है, वो कौन हैं, किसी को नहीं पता। उनके फर्जी आश्रित बनाकर उन्हें विभाग की तरफ से एक-एक लाख रुपये मुआवजा राशि के चेक भी जारी कर दिए गए। सूत्रों के अनुसार जिन लोगों को नौकरी पर रखा गया है, उनसे भी 10 से 15 लाख रुपये की वसूली की गई है।

रिकार्ड में मरने वाले कोई नहीं,  नौकरी के लिए वसूले 10 से 15 लाख, जांच के लिए एसआइटी गठित

घोटाला का पता चलते ही स्वास्थ्य विभाग के डायरेक्टर के आदेश पर सिविल सर्जन डा. रोहित मेहता ने इसकी जांच लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआइटी) का गठन कर दिया। इसमें तीन अधिकारियों को शामिल किया गया है। एसआइटी ने कुछ अहम सुबूत जुटाए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार जिले के अलग-अलग अस्पतालों के सीनियर मेडिकल आफिसर (एसएमओ) की मिलीभगत से यह घोटाला हुआ। हालांकि, किसी भी कर्मचारी की मौत नहीं हुई। अब एसआइटी की जांच में इस पूरे नेटवर्क की सच्चाई सामने आएगी।

ऐसे खुला राज

एक जनवरी को सिविल सर्जन का पद संभालने वाले डा. रोहित मेहता के हाथ एक दस्तावेज लगा। उन्हें संदेह हुआ कि बतौर एसएमओ सेवाएं देते समय उनके ध्यान में तो ऐसा कोई मामला नहीं आया, जिसमें दर्जा चार कर्मचारियों की मौत हुई हो। कुछ दिन बाद एक व्यक्ति ज्वाइनिंग के लिए उनके कार्यालय पहुंचा।

बताया जाता है कि यह छठा कर्मी था। इससे पहले पांच ज्वाइन कर चुके थे। सिविल सर्जन ने जब उससे मृतक कर्मी का रिकार्ड व दस्तावेज मांगे तो अगले दिन आने का बहाना बनाकर वह व्यक्ति फरार हो गया। फिर सेहत विभाग के चंडीगढ़ स्थित कार्यालय से पता करवाया कि जिला तरनतारन में दर्जा चार श्रेणी के छह कर्मियों की मौत होने की रिपोर्ट सिविल सर्जन कार्यालय से आई थी। इसी कारण वहां से भी सभी आश्रितों को नौकरी के लिए हरी झंडी भी दे दी गई।

बड़ी कड़ी होने की आशंका

इस घोटाले में नीचे से लेकर ऊपर तक बड़ी चेन होने की आशंका है। जिले के विभिन्न अस्पतालों से संबंधित अकाउंट ब्रांच के अमले, संबंधित एसएमओ के अलावा सेवानिवृत्त हुए सिविल सर्जन के साथ-साथ कार्यालय के स्टाफ के 24 से अधिक कर्मियों को जांच के घेरे में लिया गया है। इसी तरह प्राइवेट बैंक के अधिकारी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं, जिनके इशारे पर सेहत विभाग से जारी हुए छह लाख के चेक कैश हुए।

 पूर्व सिविल सर्जन बोले- रिपोर्ट के आधार पर हस्ताक्षर कर किए होंगे

एक जून, 2019 से 31 दिसंबर, 2020 तक सिविल सर्जन रहे डा. अनूप कुमार ने कहा कि रूटीन में किसी रिपोर्ट के आधार पर हस्ताक्षर करके उसे आगे भेजा गया होगा। उन्हें इतनी जानकारी नहीं है। एसएमओ की रिपोर्ट के आधार पर ही सिविल सर्जन अपनी रिपोर्ट आगे भेजते हैं। जानबूझकर कोई गलत काम नहीं किया।

सिविल सर्जन बोले- मुझे धमकाया जा रहा

'' फर्जीवाड़े की जांच के लिए एसआइटी का गठन हो चुका है। टीम के हाथ कुछ दस्तावेज भी लगे हैं। अब यह ट्रेस किया जा रहा है कि जिन लोगों को मरा घोषित किया गया, वह कौन थे। मुझे भी इस मामले में धमकाया जा रहा है, लेकिन मैं डरने वाला नहीं। जांच पूरी होने तक इस मामले में और कुछ नहीं कहूंगा।

                                                                                      - डा. रोहित मेहता, सिविल सर्जन, तरनतारन।

 

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