जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : जंगल की आग की सूचना के लिए वन विभाग अब स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मदद लेगा। इसके बाद आग पर काबू पाने के लिए गांव वालों का साथ लिया जाएगा। वन विभाग का फोकस जन सहभागिता के जरिए लपटों को शांत करने पर है। इसलिए तराई पूर्वी डिवीजन के डीएफओ संदीप कुमार के निर्देश पर डिवीजन के सभी 56 क्रू स्टेशन पर स्थानीय जिला पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान व बीडीसी मेंबर के नंबर भी चस्पा किए गए हैं। फारेस्ट का मानना है कि आग लगने के बाद संख्याबल से ज्यादा इससे ज्यादा असर होता है कि कितनी जल्दी टीम मौके पर पहुंची।

15 जून से 15 फरवरी यानी फारेस्ट फायर सीजन में वन विभाग की चुनौतियां व मुश्किलें बढ़ जाती है। तराई पूर्वी डिवीजन को कुमाऊं की सबसे बड़ी डिवीजन है। डीएफओ संदीप कुमार ने बताया कि हल्द्वानी स्थित कार्यालय में बने मास्टर कंट्रोल रूम में सेटेलाइट के जरिए आग की सूचना पहुंचती है। जिसके बाद संबंधित क्रू स्टेशन को अलर्ट किया जाता है। जनप्रतिनिधियों के नंबर इसलिए डिस्पले किए गए है कि वन विभाग से लेकर आम लोग भी किसी भी सूचना पर उन्हें अलर्ट करने के साथ मदद मांग सके। ग्रामीणों को इसके लिए जागरूक भी किया गया था। क्योंकि, वनाग्नि का दायरा बढऩे के बाद काबू पाना बेहद मुश्किल हो जाता है। अगर जानकारी मिलते ही वनकर्मी व स्थानीय लोग जुट जाए तो वनसंपदा का नुकसान कम होगा।

क्रू स्टेशन का मतलब

वन चौकी या बैरियर पर भी फायर सीजन के दौरान क्रू स्टेशन बनाए जाते हैं। रेंज के हिसाब हर स्टेशन पर छह से आठ लोग तैनात किए जाते हैं। जो कि स्थानीय से लेकर डिवीजन स्तर से मिलने वाली हर सूचना पर अलर्ट हो जाती है।

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