आगरा, (राजेश मिश्रा): झील, पत्थर, मंदिर और महलों वाले पड़ोसी राज्य राजस्थान के धौलपुर जिले का सियासी मौसम सर्दी की सुगबुगाहट के साथ गरमाने लगा है। बलुआ पत्थर वाली इस जमीं पर उकरी लकीरें मिटाना आसां नहीं होता। पिछले उपचुनाव में अगाध निष्ठा दिखाने के प्रतिफल में एक तोहफा भी न मिलने पर ये बलुआ पत्थर अपने महल से बेहद खफा-खफा सा है।

बात हो रही है धौलपुर विधानसभा सीट की। ये मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का गृह जनपद है। यहां पर हमेशा कांग्रेस ही भारी रही। आजादी के बाद हुए अब तक के चुनाव में यहां पर कांग्र्रेस सात बार जबकि पांच बार भाजपा जीत पाई है। दो अन्य जीते। पिछले चुनाव में यहां से बसपा के हाथी की चिंघाड़ ने सबको पानी पिला दिया था। मगर, निर्वाचित विधायक बाबूलाल कुशवाह को एक मामले में आरोपित होने के कारण इस्तीफा देना पड़ा था। सत्तारूढ़ भाजपा ने उपचुनाव में बाबूलाल की पत्नी शोभारानी को कमल थमाकर जयपुर पहुंचा दिया था। तब बलुआ पत्थर ने ये ख्वाब पाला था कि महल उसकी नींव पर विकास का बुर्ज खड़ा कर देगा। जिला सीट ही क्यों, राजाखेड़ा, बाड़ी और बसेड़ी सीट के लोगों को भी इस महल की ताकत पर गुमान हो गया था। ये गुमान तो टूट गया है। अब सबक सिखाएंगे या भूल जाएंगे, ये तो मतदान के बाद ही पता चलेगा। राजाखेड़ा में वर्तमान में कांग्रेस के दिग्गज प्रद्युम्न सिंह तो बाड़ी में कांग्रेस के गिर्राज सिंह मलिंगा विधायक हैं। बसेड़ी सुरक्षित पर भाजपा की रानी सिलोटिया विधायक हैं।

ठंडक हो या गरमाहट, पत्थर बड़ी शिद्दत से निभाता है। मांगरौल के दामोदर कहते हैं कि राजे ने आखिर दिया क्या? रोजगार, शिक्षा के लिए कोई बड़े प्रोजेक्ट की तो छोडि़ए, मूलभूत सुविधाओं पर भी गंभीरता नहीं दिखाई। वोट पर तो वे चुप्पी साध गए, मगर राहुल गांधी में उन्हें कुछ खास नजर आने लगा है। बीएड के छात्र रंजीत सिंह को उच्च शिक्षा संस्थान की आस थी। अगर यहां पर कोई बड़ी कंपनी आ जाती तो रोजगार मिल जाता। राजाखेड़ा विधानसभा क्षेत्र के मनिया निवासी बाबूलाल और मोहन तो बेहद खफा हैं। बाबूलाल कहते हैं कि मोदी ने नोटबंदी कर दी। बिटिया का ब्याह जैसे-तैसे कर पाए। गैस कनेक्शन तो दे दिया, अब सिलिंडर भरवाने के लिए एक हजार रुपये कहां से लाएं। मोहन ने कहा कि उनकी पेंशन रोक दी गई। मनरेगा में काम नहीं मिल रहा, कैसे पेट पालें? मनिया के छात्र सचिन शर्मा को प्रदेश सरकार से शिकायत है कि जिले का स्टेडियम शोपीस बना हुआ है। यहां पर खेल भी नहीं हो पाते। बाड़ी जिले के व्यापारी केशव भी मुख्यमंत्री से नाराज हैं कि अपना जिला होने के बाद भी कुछ नहीं किया। रेलवे रूट को ब्रॉड गेज करने से रुकवा दिया, क्यों? रोजगार के लिए युवा दूसरे शहरों में जाते हैं। यहां पर कोई इंतजाम नहीं किए।

Posted By: Prateek Gupta

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