रायबरेली : मकर संक्रांति पर गंगा तटों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। तड़के से ही स्नानका सिलसिला शुरू हो गया। जिले के गेगासो, डलमऊ, गोकना गंगा घाटों पर कड़ाके की ठंड में भी आस्था भारी पड़ी। श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद भगवान सूर्य को अ‌र्घ्य दिया। इसके बाद घाटों पर स्थित देवी देवताओं का पूरे विधिविधान से पूजन अर्चन किया। वहीं तीर्थ पुरोहितों और जरूरतमंदों को दान देकर कुटुंब के कल्याण की कामना की। हालांकि कोरोना संक्रमण को देखते हुए ज्यादा भीड़ नहीं रही।

महामंडलेश्वर स्वामी देवेंद्रानंद गिरि ने बताया कि सूर्य व पवित्र नदियों की आराधना तथा अन्न (फसलों) के सम्मान के रुप में यह पर्व मनाया जाता है। मकर संक्रांति के पर्व का हिदू धर्म में महत्व माना गया है। वहीं मकर संक्रांति खगोलीय घटना है, इससे जड़ और चेतन की दशा और दिशा तय होती है। मकर संक्रांति के अवसर पर खिचड़ी, तिल व गर्म कपड़े जरूरतमंदों को दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। बड़ा मठ परिसर में गरीबों को खिचड़ी का वितरण किया गया। महामंडलेश्वर ने 51 गरीबों को मकर संक्रांति के अवसर पर कंबल व कपड़े वितरित किए।

सभी घाटों पर जलवाए अलाव

डलमऊ : राजघाट, वीआइपी, रानी शिवाला, संकटमोचन, पक्का, पथवारी समेत सभी 16 घाटों पर आसपास के गांवों के लोग पहुंचे। सभी ने शुभ मुहुर्त में स्नान किया। नगर पंचायत की ओर से श्रद्धालुओं को ठंड में राहत देने के लिए सभी घाटों पर अलाव जलवाए गए।

मकर संक्रांति का दान सबसे उत्तम

ऊंचाहार : गोकना घाट पर दूरदराज से आए श्रद्धालुओं ने स्नान कर पूजन अर्चन व दीपदान किया। घने कोहरे और पछुआ हवाओं के चलते ठंड बढ़ने से इस बार श्रद्धालुओं की संख्या बहुत कम दिखाई दी। तीर्थ पुरोहित जितेंद्र द्विवेदी ने बताया कि मकर संक्रांति के दिन दिया गया अनाज का दान बहुत ही उत्तम माना जाता है।

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