लखनऊ (जागरण संवाददाता)। मैं जी भर जीया, मैं मन से मरूं, लौट कर आऊंगा कूच से क्यों डरूं... इस पंक्ति के साथ भारतरत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद किया गया। अटल बिहारी वाजपेयी के निधन की मासिक पुण्यतिथि पर रविवार को लखनऊ उत्तर विधानसभा अंतर्गत उमराव सिंह धर्मशाला में कार्यक्रम काव्यांजलि कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने कविताओं के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि दी। भाजपा विधायक डॉ. नीरज बोरा की ओर से आयोजित कवि सम्मेलन में अटल बिहारी वाजपेयी पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी दिखाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ अटल बिहारी के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। विधायक डॉ. नीरज बोरा ने अटल जी के जीवन पर प्रकाश डाला। कवि सम्मेलन का आगाज रमेश रंजन मिश्र की कविता से हुआ। उन्होंने छोड़कर धरा धाम सुरलोक में, करने किसका गए मान मर्दन लिखे, क्या हुआ क्यों हुआ और कैसे हुआ सिंह गर्जन लिखे... पढ़कर सभी की तालियां बटोरीं।  वहीं कवि कमल आग्नेय ने अटल जी की याद में देह से बस आत्मा का भार कुछ कम हो गया है, जो अटल था वह सच में अटलतम हो गया... पढ़कर वाहवाही लूटी। रूपा पांडे सतरूपा ने इक अटल जीवन के सम्मुख सिर झुकाए, मृत्यु बांधे हाथ गुमसुम सी खड़ी थी... सुनाकर समां बांध दिया। विकास बौखल ने काव्य का पताका लहराया पूरे विश्व में, कवि कुल्य के शान थे अटल बिहारी वाजपेयी... सुनाकर माहौल को खुशनुमा कर दिया। इसके अलावा प्रमोद द्विवेदी, अशोक झंझटी, दुर्गेश दुबे ने भी काव्यपाठ किया। कवि सम्मेलन का संचालन बीडी शर्मा ने किया। इस मौके पर विवेक सिंह तोमर, सुरेश चंद्र अवस्थी, सत्येंद्र सिंह, अवनीश सिंह, अतुल सिंह,   रमेश कपूर, आरएन शर्मा, कुशाग्र वर्मा, दीपक मिश्रा आदि मौजूद रहे।

Posted By: Anurag Gupta