जागरण संवाददाता, कानपुर : रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले डायरेक्टर जनरल ऑफ क्वालिटी एश्योरेंस (डीजीक्यूए) विभाग में छह लिपिकों की नियुक्ति गलत तरीके से की गई थी। सीबीआइ की जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि चयनित किए गए लिपिकों की उत्तर पुस्तिकाओं में बार-बार ओवरराइटिंग कर नंबर बढ़ाए गए थे। मामले में सीबीआइ एंटी करप्शन ब्रांच लखनऊ के एडिशनल एसपी रामसिंह ने नियुक्ति बोर्ड के चेयरमेन डॉ. संतोष तिवारी समेत नियुक्त छह लिपिकों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।

2016 में डीजीक्यूए विभाग में रिक्तपदों पर आवेदन मांगे गए थे। छह पदों के लिए 952 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी। नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने के बाद अभ्यर्थियों ने घालमेल के आरोप लगाए थे और रक्षा मंत्रालय, पीएमओ से इसकी शिकायत की थी। मामले की जांच सीबीआइ को सौंपी गई। दस्तावेज खंगालने के बाद सीबीआइ ने उत्तरपुस्तिकाओं में ओवरराइटिंग किए जाने की पुष्टि की है। इसके बाद उन तमाम नियुक्तियों पर भी सवालिया निशान लग गया है जिन पर कभी न कभी अंगुली उठाई गई थी। अब सीबीआइ कुछ अन्य अधिकारियों से भी इस संबंध में पूछताछ कर सकती है। सीबीआइ ने रिपोर्ट में लिखा है कि जिन छह बाबुओं का चयन किया गया है उनकी उत्तर पुस्तिकाओं में बहुत गड़बड़ियां मिली हैं। कई बार ओवरराइटिंग कर उत्तर बदले गए हैं। अर्पित सिंह के नंबर 58 से बढ़ाकर 69 जबकि आरती गुप्ता के अंक 68 से बढ़ाकर 70 किए गए हैं। इसके अलावा विवेक चंद्र के अंक 52 से बढ़ाकर 61 किए गए। चयन बोर्ड के चेयरमैन डॉ. संतोष तिवारी के अलावा रविकांत पांडेय, उत्कर्ष श्रीवास्तव, आरती गुप्ता, प्रतिभा मिश्रा व अर्पित सिंह के खिलाफ सीबीआइ ने मामला दर्ज कराया है।

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पांच दिन तक सीबीआइ ने की थी जांच

डेढ़ महीने पहले सीबीआइ ने लगातार पांच दिन तक डीजीक्यूए में रहकर चयन बोर्ड के अधिकारियों, क्लर्कों व कर्मचारियों से पूछताछ की थी। इस दौरान कई अहम साक्ष्य सीबीआइ के हाथ लगे थे।

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