रांची [विश्वजीत भट्ट] । रांची के रातू अंचल के सीओ राजेश कुमार मिश्रा के खिलाफ प्रपत्र क गठित करने की कार्रवाई एक वर्ष से चल रही है। इसके बावजूद राजेश कुमार मिश्रा अब तक अपने पद पर बने हुए हैं। रातू अंचल के सीओ के खिलाफ उपायुक्त रांची को गंभीर शिकायतें प्राप्त हुई थीं। अनुमंडल पदाधिकारी रांची की जांच में शिकायतें सही पाई गईं। रातू अंचल के सीओ 40 दिनों तक बगैर सूचना के अनुपस्थित रहे। लिहाजा उपायुक्त की तरफ से जांच रिपोर्ट के आधार पर सीओ के खिलाफ प्रपत्र क गठित करने की कार्रवाई प्रारंभ की गई। अनुपस्थिति की अवधि के लिए अलग से नो वर्क नो पे का निर्देश दिया गया।

इस कार्रवाई की अनुशंसा गत छह मार्च 2020 को की गई। फरवरी 2021 तक रातू सीओ अपने पद पर कायम हैं। विभाग की तरफ से तत्कालीन उपायुक्त की ओर से की गई कार्रवाई पर नवंबर 2020 में उपायुक्त कार्यालय से मंतव्य मांगा गया था। तत्कालीन उपायुक्त की कार्रवाई के आलोक में पूरे मामले की समीक्षा करने के बाद वर्तमान उपायुक्त की तरफ से पूर्व की कार्रवाई को तथ्यपरक करार दिया गया। इसके बावजूद अनियमितता के आरोपी सीओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। इस बीच अंचल में कार्यरत एक कर्मचारी को अपराधियों ने गोली मार दी। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

एक दिन की छुट्टी का आवेदन देकर हो गए थे गायब, दाखिल खारिज के लिए आए आवेदनों को रखा लंबित

सीओ राजेश कुमार मिश्रा के खिलाफ उपायुक्त की तरफ से कराई गई जांच में आरोपों की लंबी फेहरिश्त सामने आई।अनुमंडल पदाधिकारी रांची की तरफ से किए गए निरीक्षण में पता चला कि सीओ एक दिन की छुट्टी का आवेदन देकर अनिश्चित काल के लिए अवकाश पर चले गए। आम लोगों की तरफ से मुख्यमंत्री कार्यालय को की गई शिकायत में कहा गया कि रातू अंचल के सीओ की तरफ से दाखिल खारिज के लिए दिए गए आवेदनों को लंबित रखा जाता है। अनुमंडल पदाधिकारी की जांच में यह आरोप सही पाए गए। अंचलाधिकारी के लॉगिन में 104, अंचल निरीक्षक के लॉगिन में 95, राजस्व कर्मचारी के लॉगिन में 617 आवेदन लंबित पाए गए।

गलत तरीके से म्यूटेशन कराने के मामले में पाए गए दोषी

रातू अंचल के सीओ के खिलाफ अनियमितताओं से जुड़े मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसके बावजूद विभाग की ओर से उनकी सेवाएं ली जा रही हैं। राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव के पत्र के आलोक में रातू अंचल के 32 डिसमिल जमीन के म्यूटेशन के मामले की जांच कराई गई। जांच में पता चला कि अंचलाधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत से गलत तरीके से म्यूटेशन किया गया। सीओ के खिलाफ आरोप सिद्ध होने के बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं की गई है।

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