नई दिल्ली (राजेश उपाध्याय)। शहर सभ्यता का प्रतीक होते हैं। पहले नदियों के किनारे शहर और सभ्यता दोनों पलते, बढ़ते थे। अब जहां रोजगार और बेहतर जीवन की गारंटी है वहां शहर बसते-बढ़ते हैं। हर शहर की एक खास पहचान होती है। खास तासीर होती है। आप उस शहर में पैदा हुए हों या रोजी रोटी की तलाश में पहुंचे हों, शहर लगभग हमेशा आपका स्वागत करता और आपके साथ रहता है, आपके अंदर रहता है। सैकड़ों साल में बसा यह शहर, आपके साथ-साथ दौड़ता, गिरता-उठता है। आपकी हर कमी, खूबी के साथ आपको गले लगाता है।

सौ साल में बसा ये शहर: माय सिटी माय प्राइड, विकास के लिए चाहिए बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर की नींव

आप खाली हाथ हैं तब भी शहर आपके लिए एक संभावना है। और इसलिए वह आपकी जान है, आपकी शान है! आपने ‘दिल्ली मेरी जान’ सुना होगा। शायर जौक का कहा भी सुना होगा कि ‘कौन जाए जौक ये दिल्ली की गलियां छोड़ कर’! पर कभी सोचा है कि आपका शहर भी आपकी जान है! आपके अंदर बसा है! आपका पहला प्यार आपका शहर, उसकी गलियां, आपका स्कूल, कॉलेज, थियटर, पुराने बाजार हैं।

कई बार इसकी कमियों से आपको खीज होती होगी, परेशानी होती होगी, ट्रैफिक जाम से गुस्सा आता होगा, अस्पताल और स्कूलों की कमी खलती होगी, गांव और कस्बे से आ रहे लोगों की वजह से शहर की घटती सुविधाओं पर चिंता होती होगी, सुरक्षा को लेकर आशंका बढ़ती होगी, फिर भी आपका शहर तो आपका ही है! और इसलिए इसको बेहतर बनाने की बात मन में आती होगी।     

 

 बताएं, शहर की हेल्थ, इंफ्रा, एजुकेशन, इकोनॉमी और सेफ्टी का हाल

सौ साल में बसा ये शहर: माय सिटी माय प्राइड: शहरों के उत्थान-पतन से जुड़े अर्थव्यवस्था के पांच नियम!

सौ साल में बसा ये शहर: माय सिटी माय प्राइड, विश्व गुरु से विश्व प्रबंधक तो बने हम पर सर्वशिक्षित होना अब भी शेष है!

सवाल है आप कैसे इसे बेहतर बना सकते हैं? आप यह सोच कर चुप नहीं बैठें कि आप अकेले हैं और अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता! आपकी एक सोच आगे चल कर हजारों और लाखों की सोच बन सकती है। एक अच्छा विचार, एक अच्छा सुझाव, एक अच्छी पहल आपके शहर की शक्लो सूरत बदल सकती है। आप जो महसूस कर रहे हैं वह औरों की सोच भी हो सकती है। संकोच न करें, समस्या बताएं, सुझाव शेयर करें, बदलाव से जुड़ें, बदलाव का माध्यम बनें। हर समस्या को समझने और उसके संभावित समाधान को खोजने के लिए हम आपके साथ होंगे।

सवाल है, कोई शहर कैसे ग्रोथ सेंटर बन सकता है? कुछ शहर दूसरों की तुलना में तेज़ी से क्यों बढ़ते हैं, इसका कोई सामान्य उत्तर नहीं है। लेकिन, पिछले 50 सालों में शहरी विकास पर दुनियाभर में हुई विभिन्न रिसर्च से हमें शहरों के उत्थान और पतन की कहानियों का पता चलता है। जैसे तरक्की के लिए शहर की लोकेशन और तीव्र आवागमन सुविधाओं से लेकर पानी, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और कुशल कर्मचारियों की उपलब्धता भी अनिवार्य है। साथ ही स्थानीय प्रशासन और कुशल नेतृत्व भी एक असरकारक बिंदु है। 

आइए, जागरण समूह के साथ अपने शहर, समाज और परिवार के लिए एक छोटी ही सही मगर सार्थक पहल की शुरुआत करें। 'माय सिटी माय प्राइड' अभियान आप जैसे ही सजग, विचारशील नागरिकों के लिए है। इसमें दैनिक जागरण, Jagran.com की विशाल टीम और रेडियो सिटी के जॉकी आपकी राय और सुझावों को इस पहल का हिस्सा बनाएंगे। यह शहर आपसे सहयोग मांग रहा है। आइए, शहर के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं।   

सौ साल में बसा ये शहर: माय सिटी माय प्राइड: सुरक्षा को लेकर शहरों को अभी और सभ्य होना है!

सौ साल में बसा ये शहर: माय सिटी माय प्राइड, बेहतर होंगी स्वास्थ्य सुविधाएँ तो खुशहाल होंगे आप! 

By Nandlal Sharma