पटना, जेएनएन। रविवार को जागरण फिल्म फेस्टिवल का तीसरा अंतिम दिन है। सुबह से ही सिने प्रेमियों का जुटान पीएन एंड मॉल के सिने पोलिस में होने लगा है। इतवार की छुट्टी की वजह से हॉल खचाखच भरा है। फिल्म हो या शार्ट फिल्म सभी को दशर्क सराह रहे हैं। एक-एक सीन पर ताली बज रही है। रिचा चड्ढ़ा से फिल्मों की बारीकियां जानने के लिए बड़ी संख्या में सिने प्रेमी जुटे।

इधर, दूसरे दिन यानी शनिवार को पटना के दर्शकों का सिनेमा के प्रति प्यार खूब दिखा। सुबह से देर रात तक सभी शो हाउसफुल रहे। फिल्मों का चयन ऐसा था कि इसमें युवा से लेकर बुजुर्ग दर्शकों तक सबके लिए कुछ न कुछ था।

पाटलिपुत्र स्थित सिनेपोलिस में सुबह 10:45 बजे कंट्री पार्टनर अर्जेंटीना की फिल्म आइ टीटा : ए लाइफ ऑफ टैंगो से रजनीगंधा जागरण फिल्म फेस्टिवल के दूसरे दिन का पर्दा उठा। इसके बाद अनिल कपूर रेट्रोस्पेक्टिव में सुपरहिट फिल्म 'रामलखन' दिखाई गई। 'कोटा फैक्ट्री' फिल्म के दौरान बड़ी संख्या में युवा दर्शक दिखे। मास्टरक्लास में शहर के रंगकर्मियों और युवा फिल्मकारों को टिप्स मिले। 'मील' शॉर्ट फिल्म के दौरान भी सिनेमाहॉल की कुर्सियां भरी रहीं। शाम के शो में हॉरर फिल्म 'तुम्बाड' दिखाई गई। शास्त्री जी की मौत के रहस्यों को खोलती फिल्म 'ताशकंद फाइल' में युवाओं के साथ बुजुर्ग दर्शक भी दिखे।

'मील' में दिखा भूख का संघर्ष

अभिरूप बसु निर्देशित 11 मिनट की शार्ट फिल्म 'मील' में मध्यवर्गीय परिवार की कहानी दिखाई गई। अपार्टमेंट में सन्नाटा पसरा है। घर के लोग किसी से बात नहीं कर रहे। भोजन बनाने वाली महिला किचन में अपना पसीना बहा रही है और उधर घर के बुजुर्ग सदस्य अपनी बीमारी और हालात को लेकर मजबूर हैं। फिल्म का यह दृश्य दर्शकों की बेचैनी बढ़ाता रहा। बिना संवाद के कुछ मिनट तक चल रही फिल्म में एक मां की लाचारी के साथ घर की आर्थिक स्थिति को बखूबी दिखाया गया। दर्शकों को फिल्म काफी पसंद आई।

हस्तर का श्राप परिवार के लिए बन जाता है वरदान

निर्माता आनंद एल राय और सोहम शाह की फिल्म तुम्बाड की कहानी का मूल यही है कि ज्यादा पाने की लालच में इंसान शैतान बन जाता है। फिल्म में अभिशाप और आशीर्वाद का घालमेल दिखाया जाता है। रहस्य और रोमांच से भरी फिल्म जिसमें पैसे के लालच को बखूबी दिखाया गया।

फिल्म का मुख्य किरेदार विनायक पैसे के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर खंडरनुमा महल से सोने की चोरी में लगा रहता है। कहानी महाराष्ट्र के एक गांव तुम्बाड की है, जहां पर दैवीय प्रकोप है। फिल्म का एक दृश्य है, जब विनायक पैसे की लालच में अपने बेटे को भी गांव में ले जाता है। यहां पर राक्षस हस्तर विनायक की मौत कर देता है और देखते-देखते पूरा परिवार खत्म हो जाता है। फिल्म प्रस्तुति के दौरान दर्शक भी कुछ सीन को देख भयभीत हो गए। फिल्म में सोहम शाह, हरीश खन्ना, रोजनी चक्रवर्ती, मोहम्मद सामद, ज्योति मालशे, अनीता दाते का अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा।

लाल बहादुर शास्त्री की मौत की गुत्थी सुलझाती फिल्म ताशकंद फाइल

 विवेक अग्निहोत्री की फिल्म 'ताशकंद फाइल' दूसरे दिन की आखिरी फिल्म रही जो दर्शकों को खूब पंसद आई। फिल्म की शुरुआत से लेकर अंत तक दर्शक शास्त्री जी की मौत की असली वजह जानने को बेताब दिखे। जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती जा रही थी शास्त्रीजी की मौत की परतें खुलती जा रही थीं। फिल्म प्रस्तुति के दौरान अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती के संवाद 'राजनीति में कुछ सच नहीं होता' पर खूब तालियां बजीं।

'तुम शास्त्री की मौत को क्यों जगह दे रहे हो। इंसान सेवानिवृत्त होने के बाद पावर और अपनी पहचान खो देता है। कितनी बड़ी विडंबना है लोग सभी कुछ जानते हुए भी खामोश है। कोई सच जानने के लिए आवाज नहीं उठाता। ऐसे संवाद सुन दर्शकों ने तालियां बजाईं।

फिल्म में रागिनी फुले जो एक पत्रकार है, उसके काम को दर्शकों ने सराहा। वह सनसनी खोज खबरों की तलाश में होती है। फिल्म में पंकज त्रिपाठी की भूमिका को दर्शकों ने खूब सराहा। नसीरूद्दीन शाह का संवाद 'कौन कहता है कि मरे हुए आदमी से फायदा नहीं होता' ने भी गहरा संदेश दिया। फिल्म में राजेश शर्मा, मंदिरा बेदी, पल्लवी जोशी आदि कलाकारों ने दर्शकों पर अमिट छाप छोड़ी।

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Posted By: Akshay Pandey

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