संवाद सहयोगी, ठाकुरगंगटी : बनियाडीह ग्राम में दो दिवसीय संतमत सत्संग का आयोजन किया गया। गुरुवार को संतमत सत्संग के प्रधान आचार्य महर्षि स्वामी चतुरानंद जी महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन सिर्फ और सिर्फ धार्मिक कार्यों के लिए ही हुआ है। इसलिए मनुष्य को हर परिस्थिति में सर्वप्रथम धर्म के प्रति ही आस्था , विश्वास व्यक्त करना चाहिए। समय का अधिक से अधिक सदुपयोग करना चाहिए। इसके लिए ध्यान , सत्संग , भजन , कीर्तन के माध्यम से प्रभु की भक्ति करें।

सत्संग करने की कोई उम्र सीमा नहीं होती। सत्संग अर्थात सत्य का संग। बचपन से भी लोग सत्संग कर सकते हैं या जब लोगों को ज्ञान हो जाए। उसी दिन से सत्संग शुरू कर देना चाहिए। सत्संग शुरू करते ही झूठ , चोरी , नशा , हिसा , व्यभिचार से दूर हो जाना चाहिए। सत्संग करने वालों को कहीं जाने की कोई आवश्यकता नहीं है और कुछ खोजने की आवश्यकता नहीं है। प्रत्येक मनुष्य के शरीर में आत्मा रूपी परमात्मा विराजमान है । कहा गया है कि (आरती तन मंदिर में कीजै ) अर्थात आरती अपने शरीर रूपी मंदिर की ही करनी चाहिए । जिस शरीर रूपी मंदिर में आत्मा के रूप में परमात्मा छिपे हुए हैं प्रतिदिन ध्यान करते करते श्रद्धालु एक दिन शरीर के अंदर आत्मा की ओर धीरे-धीरे बढ़ते हैं।

कहा कि सत्संग करने वाले श्रद्धालुओं को कठिन परिश्रम और तपस्या करनी पड़ती है । सही ढंग से ध्यान , साधना करने वाले श्रद्धालु बैकुंठ तक को भी प्राप्त कर लेते हैं। इसके अलावा भी कई महात्मा ने भी विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम को सफल बनाने में आयोजक बनियाडीह गांव के सेवानिवृत्त शिक्षक हीरालाल मंडल सहित प्रोफेसर दिनेश भगत , सामाजिक कार्यकर्ता गोपाल यादव , नरेंद्र कुमार सहित बनियाडीह गांव के दर्जनों ग्रामीणों एवं निकटवर्ती ग्रामीणों ने सहयोग किया ।

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