दिलीप सिंह, अमेठी : पांच साल में 17 थानेदारों का अनुभव लेने वाली जिला मुख्यालय की कोतवाली गौरीगंज की रंगत बदलने लगी है। अब तक पुलिस महकमे में यहां की कुर्सी शुभ नहीं मानी जाती थी। ज्यादातर थानेदारों को यहां अपनी कुर्सी समय-समय पर वजह-बेवजह गंवानी ही पड़ी, जिसका असर यहां के कामकाज पर भी पड़ा।

बहरहाल, पुलिस व जनता के बीच दूरी बढ़ी तो अपराध के ग्राफ में भी उछाल आया। ऐसे में ढाई माह पहले उन्नाव से आए अरुण कुमार द्विवेदी को पुलिस अधीक्षक ने कमान सौंपी। इंस्पेक्टर ने पहले थाना परिसर को सजाया-संवारा और अब कार्य-व्यवहार में बदलाव लाकर जनता के करीब जाने की सार्थक पहल की है।

तीन रजिस्टरों में रखा जा रहा पूरा लेखा-जोखा :

कोतवाली में आने वाली हर शिकायत को दर्ज करने के बाद ही उसे निस्तारण के लिए बीट के सिपाही व दारोगा को बकायदा समय अंकित करते हुए दिए जाने की व्यवस्था बनाई गई है। बीट के सिपाही व दारोगा को शिकायत मिलने के 24 घंटे के अंदर उसका निस्तारण कर अपनी रिपोर्ट कोतवाली प्रभारी को देनी होगी, जो कि समाधान रजिस्टर में दर्ज होगी। इसके साथ ही महिला व दूसरे अपराधों को भी अलग-अलग रजिस्टर में दर्ज करने की व्यवस्था की गई है।

बीट के सिपाही व दारोगा की तय हुई जबावदेही :

नई व्यवस्था में बीट के सिपाही व दारोगा की सीधी जबावदेही हर मामले में तय करने का प्रयास किया गया है। समय से शिकायत के निस्तारित नहीं होने या फिर गलत तरीके से रिपोर्ट लगाने पर भविष्य में आने वाली किसी भी समस्या के लिए दोनों की संयुक्त रिपोर्ट आधार मानी जाएगी। वहीं, क्रास चेकिंग में रिपोर्ट गलत मिलने पर कार्रवाई होगी।

छोटी से छोटी शिकायत का कर रहे हैं निस्तारण :

इंस्पेक्टर गौरीगंज अरुण कुमार द्विवेदी ने बताया कि अपने कार्य में हमने छोटा से बदलाव किया है। गौरीगंज कोतवाली में आने वाली हर शिकायत को दर्ज कर उसका हर हाल में 24 घंटे में निस्तारण करने की व्यवस्था की गई है।

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