जागरण संवादाता, अमृतसर : कोविड काल के लाकडाउन के दौरान जरूरतमंदों के लिए आए राशन में हुए घोटाले की जांच अभी लंबित है। बावजूद इसके अब भी नीले कार्ड होल्डरों को पूरा राशन नहीं दिया जा रहा है। इसके चलते लोगों में डिस्ट्रिक्ट सिविल एंड फूड सप्लाई डिपार्टमेंट के अधिकारियों के खिलाफ रोष है। अमृतसर जिले में 85 वार्ड हैं। प्रत्येक वार्ड में 30 से लेकर 50 तक डिपो होल्डर हैं। शहर की साढ़े 13 लाख के करीब जनसंख्या है। इसमें 2 लाख 24 लाख उपभोक्ता हैं। 85 वार्डों में 2093 के करीब डिपो है।

अखिल भारत हिन्दू महासभा के अध्यक्ष राज कुमार ने बताया कि प्रत्येक डिपो होल्डर के पास अपने इलाके के उपभोक्ताओं को राशन बाटने के वक्त हाजिरी लगाने के लिए अपनी बायोमीट्रिक मशीन होनी चाहिए। परंतु छह से दस डिपो के पीछे एक मशीन है, राशन बांटने के वक्त उपभोक्ताओं के लिए मुश्किल खड़ी होती है। तीन-तीन, चार-चार डिपुओं का राशन सत्ताधारी पार्टी के नेताओं, विभाग के अधिकारियों और डिपो होल्डरों की कथित मिलीभगत के कारण एक ही स्थान व समय पर बांटा जाता है। इसके चलते एक योजना के तहत उपभोक्ताओं को निर्धारित से कम राशन दे दिया जाता है। कई उपभोक्ताओं को राशन देने की स्लिप काट दी जाती है। परंतु वह कई-कई दिन अपनी स्लिप लेकर राशन डिपुओं के चक्कर काटते रहते हैं। उनकी कोई भी सुनवाई नहीं करता। इतना ही नही राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते एक ही परिवार के सबंधित कई-कई लोगों और उनके नजदीकी रिश्तेदारों को विभाग ने राशन डिपो अलाट किए हुए हैं। जिनकी शिकायत भी महासभा की ओर से डिस्ट्रिक्ट फूड एंड सिविल सप्लाई विभाग को की गई परंतु कोई सुनवाई नहीं हुई।

माकपा के जिला सचिव सुच्चा सिंह ने कहा कि हर दस दिनों के बाद पार्टी के वर्कर फूड एंड सिविल सप्लाई अधिकारी के कार्यालय के बाहर धरना देकर जरूरतमंदों के राशन कार्ड रद करने और राशन घटाने के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करते है। परंतु विभाग के अधिकारी कानों में तेल डाल कर सोए हुए है। पार्टी इस मुद्दे पर संघर्ष जारी रखेगी।

मामले को लेकर डिस्ट्रिक्ट फूड एंड सिविल सप्लाई अधिकारी जसजीत कौर को फोन किया गया परंतु उनकी ओर फोन नहीं उठाया गया।

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