चंडीगढ़, जेएनएन। केंद्र की मोदी सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ कांग्रेस दो करोड़ लोगों के हस्ताक्षरों वाला ज्ञापन राष्ट्रपति को सौंप भी आई। लेकिन, प्रदेश की जनता खासकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं तक को पता भी नहीं चला कि हरियाणा में यह हस्ताक्षर अभियान कब शुरू हुआ था और कब खत्म हो गया। कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर पर दावा किया है कि सितंबर माह से हस्ताक्षर अभियान शुरू किया जा चुका था, जबकि असलियत यह है कि किसानों ने नवंबर से आंदोलन की शुरुआत की। दिसंबर में कांग्रेस ने लोगों के हस्ताक्षरों वाले कागजों के बंडलों से भरे ट्रक तैयार कर लिए। अब इन ट्रकों में भरे कागजों के बंडल कब और कहां तैयार हुए, इस बड़े सवाल का जवाब कांग्रेस के पास नहीं है।

प्रदेश में नहीं कांग्रेस का संगठन, निगम चुनाव में प्रत्याशियों की घोषणा पहले आब्जर्वर बाद में घोषित हुए

कांग्रेस के इस हस्ताक्षर अभियान में तमाम राज्यों की भागीदारी का दावा किया जा रहा है, लेकिन हरियाणा के कांग्रेस कार्यकर्ता खुद इस बात से हैरान हैं कि उनसे कब और कहां हस्ताक्षर कराए गए, इसके बारे में उन्हें स्वयं जानकारी नहीं है। दरअसल, कांग्रेस अपने अभियान को लेकर कितनी गंभीर है, इस बात का अंदाजा इससे ही लग जाता है कि जब तीन नगर निगमों पंचकूला, अंबाला व सोनीपत के मेयर तथा पार्षद पद के उम्मीदवार घोषित किए गए तो उससे एक दिन पहले ही रात को आब्जर्वर नियुक्त हुए। आब्जर्वर नियुक्त होने के कुछ घंटे बाद यानी अगले दिन दोपहर को प्रत्याशियों की लिस्ट जारी हो गई।

कांग्रेस विधायक और आम कार्यकर्ताओं के साथ पार्टी के सहयोगी संगठनों की भागीदारी भी रही शून्य

पंचकूला नगर निगम की मेयर और पार्षद पद के उम्मीदवारों की लिस्ट तो आब्जर्वर नियुक्त होने से पहले ही आ गई थी। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि कांग्रेस ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान को लेकर कितनी गंभीरता दिखाई होगी।

कांग्रेस के किसी पदाधिकारी ने मीडिया के सामने भी आज तक यह जानकारी नहीं दी कि वह कानूनों के विरोध में कोई हस्ताक्षर अभियान चलाने वाली है। 28 सितंबर को प्रदेश अध्यक्ष कु. सैलजा के नेतृत्व में जरूर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राजभवन घेरने की कोशिश की थी। तब राज्यपाल से मुलाकात के लिए सैलजा व उनके कुछ खास साथियों को राज्यपाल के पास भेजा गया था।

कांग्रेस के इस अभियान में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा समेत अन्य कांग्रेस दिग्गजों तथा हुड्डा समर्थक विधायकों की कितनी हिस्सेदारी है, इस बात को लेकर भी कोई विधायक स्पष्ट रूप से कुछ बोलने को तैयार नहीं है। प्रदेश में कांग्रेस का संगठन भी अभी तक खड़ा नहीं हो पाया है। अशोक तंवर जब प्रदेश अध्यक्ष थे, तब भी वह सवा पांच साल तक कांग्रेस का संगठन तैयार नहीं कर पाए थे।

अब सैलजा प्रदेश अध्यक्ष हैं, लेकिन वह भी कांग्रेस का संगठन अभी तैयार नहीं कर पाई हैं, हालांकि जब उनसे इस बारे में पूछा जाता है तो उनका जवाब होता है कि हर जिले में धरातल पर कार्यकर्ता काम कर रहे हैं, लेकिन उनके सिर्फ इस बयान से कांग्रेस का भला होने वाला नहीं है। खास बात यह है कि इस हस्ताक्षर अभियान में कांग्रेस के किसी सहयोगी संगठन महिला कांग्रेस, युवक कांग्रेस, सेवादल या एनएसयूआइ की भूमिका कहीं नजर नहीं आई।

'कांग्रेस हमेशा छलावे की राजनीति करती आई'

'' कांग्रेस हमेशा छलावे की राजनीति करती आई है। उसका कोई संगठन नहीं है। लोग कांग्रेस को पूरी तरह से नकार चुके हैं। वह भोले किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीतिक लाभ हासिल करने की फिराक में हैं, जिसमें उसे कामयाबी नहीं मिलने वाली है। मोदी सरकार के जिन कृषि कानूनों के खिलाफ देश भर में हस्ताक्षर अभियान चलाए जाने का दावा किया गया है, वह फर्जी है। हरियाणा में ऐसा कोई अभियान‍ नहीं दिखा। हरियाणा के किसान इन कानूनों के समर्थन में हैं।

                                                                                 - ओमप्रकाश धनखड़, अध्यक्ष, हरियाणा भाजपा।

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'हरियाणा के लोगों ने बढ़ चढ़कर भागीदारी की'

'' कांग्रेस हाईकमान के निर्देश पर देश के तमाम राज्यों में तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। यह अभियान पूरे दो माह तक चला है। कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से धरातल पर जाकर हस्ताक्षर अभियान चलाया। हर राज्य के लोग इन कृषि कानूनों के खिलाफ हैं। हरियाणा के लोगों ने भी बढ़ चढ़कर इस अभियान में भागीदारी की है। भाजपा खुद छलावा है। इसलिए उसे दूसरों में भी छलावा नजर आता है।

                                                                                      - कुमारी सैलजा, अध्यक्ष, हरियाणा कांग्रेस।

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