सिक्किम में लैंडस्लाइड: झोलुंगे सुरंग में गैस रिसाव के बाद फंसे 16 मजदूरों को सुरक्षित निकाला
पूर्वी सिक्किम में तीस्ता जलविद्युत परियोजना की झोलुंगे सुरंग में भूस्खलन और गैस रिसाव के बाद 16 मजदूर फंस गए थे।
HighLights
पूर्वी सिक्किम की झोलुंगे सुरंग में 16 मजदूर फंसे।
भूस्खलन और गैस रिसाव के कारण हुई घटना।
बचाव दल ने सभी मजदूरों को सुरक्षित निकाला।
डिजिटल डेस्क, गंगटोक। पूर्वी सिक्किम के मामरिंग क्षेत्र में निर्माणाधीन तीस्ता जलविद्युत परियोजना चरण-6 की झोलुंगे (समरदुंग) ऑडिट सुरंग में सोमवार को भूस्खलन के बाद गैस रिसाव होने से 16 मजदूर सुरंग के भीतर फंस गए। कई घंटे तक चले राहत एवं बचाव अभियान के बाद सभी मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में अफरातफरी का माहौल बन गया।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सुरंग के भीतर भूस्खलन होने से एक हिस्सा अवरुद्ध हो गया और उसके बाद गैस का रिसाव शुरू हो गया। इससे सुरंग के अंदर फंसे मजदूरों तक पहुंचने में बचाव दल को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सूचना मिलते ही सिक्किम पुलिस, राज्य अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ तथा अन्य संबंधित एजेंसियां मौके पर पहुंचीं और संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया।

बचाव कार्य के दौरान गैस के प्रभाव के कारण पश्चिम बंगाल से पहुंची रेस्क्यू टीम के कुछ सदस्य चक्कर आने के बाद अचेत हो गए। उन्हें तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाकर उपचार दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि सुरंग के भीतर आक्सीजन का स्तर कम होने और प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण रहा।
पुलिस और अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने सुरंग के भीतर पहुंचकर स्थिति का आकलन किया और समन्वित अभियान चलाते हुए 16 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता हासिल की। बचाव के बाद सभी मजदूरों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, रंगपो भेजा गया, जहां उनका स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यक उपचार किया गया।

प्रशासन के अनुसार सुरंग में फंसे मजदूर देश के विभिन्न राज्यों के रहने वाले हैं। समाचार लिखे जाने तक उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई थी। अधिकारियों का कहना है कि सभी मजदूरों के सुरक्षित बाहर आने और चिकित्सकीय परीक्षण पूरा होने के बाद ही उनकी पहचान जारी की जाएगी।
घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने कहा है कि सुरंग के भीतर गैस रिसाव और भूस्खलन की वास्तविक वजह का पता लगाने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की टीम जांच करेगी। फिलहाल परियोजना स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और संबंधित क्षेत्र में आवाजाही नियंत्रित कर दी गई है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह घटना निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करती है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि समय रहते शुरू किए गए संयुक्त बचाव अभियान के कारण सभी मजदूरों की जान बचाई जा सकी।
