अमृतसर (वि.) : समाज सेवक अशोक कपूर लंगर वालों ने सुमिरन दौरान कहा कि हमारे शरीर में मन के अलावा आत्मा भी निवास करती है। हम अपना जीवन जीते हुए शरीर और मन की जरूरतों की ओर ध्यान देते हैं। लेकिन यह नहीं सोचा कि आत्मा क्या चाहती है। आत्मा प्रभु का अंश है। वह चाहती है कि हमेशा के लिए प्रभु में जाकर समा जाए। जब हम अपनी आत्मा की पुकार को सुनते हैं तब प्रभु हमें वह रास्ता दिखा देते हैं। यहां से कोई हमें प्रभु के निजधाम लेकर जा सकता है। प्रभु हमें वक्त के संत सतगुरु से मिला देते हैं जो हमें हमारे सच्चे स्वरूप के बारे में बताते हैं कि हम शरीर नहीं बल्कि एक आत्मा है। जोकि परमात्मा का ही अंश है। आत्मा अंतर में जितनी आगे की यात्रा करती है उतना ही अधिक उसे परमानंद का आनंद अनुभव होता है और यह आनंद किसी भी आत्मा के लिए सबसे महान और खुशियों से भरा हुआ है।

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