पटना, आनलाइन डेस्‍क। Split in RLJP Bihar: बिहार की राजनीति का मिजाज एक बार फिर से गर्म है। शनिवार की सुबह से चर्चा है कि नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड, भारतीय जनता पार्टी को एक और बड़ा झटका देने वाली है। यह झटका यूं तो सीधे तौर पर भाजपा को नहीं, बल्‍क‍ि उनके सहयोगी दल राष्‍ट्रीय लोक जनशक्‍त‍ि पार्टी को लगने का दावा किया जा रहा है। लेकिन, अगर यह बात सही साबित होती है तो लोकसभा में एनडीए की ताकत और कमजोर होगी। बिहार के राजनीतिक गलियारे में इस बात की चर्चा तेज है कि क्‍या केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस की अगुवाई वाली रालोजपा टूटने वाली है। हालांकि, रालोजपा ने इस बात से पूरी तरह इनकार किया है, वहीं जदयू की ओर से भी ऐसा कोई बयान सामने नहीं आया है।

ललन सिंह फैक्‍टर को लेकर कयास तेज 

दरअसल, राष्‍ट्रीय लोक जनशक्‍त‍ि पार्टी के गठन में जदयू के मौजूदा राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष ललन सिंह का बड़ा रोल रहा। ललन सिंह ने लोक जनशक्‍त‍ि पार्टी में बगावत को हवा देने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके बाद चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपति पारस के रास्‍ते अलग हो गए थे। चिराग पासवान खुद को एनडीए से बाहर बताने लगे थे, जबकि पशुपति पारस केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री बन गए थे। यह साफ है कि पशुपति पारस की पार्टी के सांसदों पर ललन सिंह का प्रभाव रहा है।

पांच में से तीन के पार्टी छोड़ने की चर्चा 

रालोजपा के पास फिलहाल लोकसभा में फिलहाल 5 सांसद हैं। इनमें एक केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस भी हैं। उनके भतीजे प्रिंस राज भी लोकसभा में हैं। राम विलास पासवान के निधन के बाद लोक जनशक्‍त‍ि पार्टी में टूट के बाद पशुपति पारस की अगुवाई वाली रालोजपा के पास 5 जबकि चिराग पासवान की लोजपा (राम विलास पासवान) के पास वह खुद ही इकलौते सांसद हैं। अब चर्चा है कि रालोजपा में एक बार फिर से टूट होने वाली है। चर्चा है कि पार्टी के तीन सांसद जदयू का दामन थाम सकते हैं। 

जदयू और भाजपा के अलग होने के बाद बदले समीकरण

जदयू के भाजपा से अलग होने के बाद बिहार में राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। लोजपा की टूट के बाद बनी दोनों ही पार्टियां लोजपा (रामविलास) और रालोजपा, भाजपा के साथ मजबूती से खड़ी हो गई हैं। पशुपति पारस की नई पार्टी बनाने में जदयू की अहम भूमिका रही, लेकिन अब इन दोनों पार्टियों का रिश्‍ता खत्‍म हो गया है। अगर रालोजपा में टूट होती है, तो इसका असर लोकसभा में एनडीए का संख्‍या बल कम होने के तौर पर नजर आएगा। 

रालोजपा में टूट के दावों में कितना दम

रालोजपा के पास फिलहाल पांच सांसद हैं। पार्टी में टूट के लिए कानूनी तौर पर कम से कम चार सांसदों (दो-तिहाई) को अलग होना पड़ेगा। इससे कम सांसद टूटते हैं, तो उनकी संसद सदस्‍यता खतरा में पड़ सकती है। जाहिर है ऐसा रिस्‍क सांसद नहीं लेना चाहेंगे। एक और बात गौर करने लायक है कि रालोजपा के पांच सांसदों में दो एक ही परिवार से जुड़े यानी चाचा- भतीजा हैं। पशुपति पारस और प्रिंस राज के बीच टूट की संभावना कम है।

पशुपति पारस के सांसदों ने किया इनकार 

वैशाली की सांसद वीणा देवी ने रालोजपा में टूट की किसी भी संभावना से पूरी तरह इनकार किया है। उन्‍होंने बताया कि पूरी तरह एकजुट हैं। नवादा के सांसद चंदन ने भी ऐसी किसी बात से इनकार किया है। प्रिंस राज से फिलहाल हमारी बात नहीं हो सकी है, लेकिन इसकी संभावना नहीं के बराबर है कि वे अपने चाचा का साथ छोड़ेंगे। इन तीन के अलावा रालोजपा के सांसदों में पशुपति पारस खुद और महबूब अली कैसर हैं। खुद केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस ने भी टूट से इनकार किया है। 

रालोजपा के सभी सांसद एकजुट हैं - श्रवण अग्रवाल 

राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रवण कुमार अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रीय लोजपा के सभी सांसद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस जी के नेतृत्व में पूरी तरह से एकजुट हैं। पार्टी प्रवक्ता श्रवण अग्रवाल ने कुछ मीडिया चैनलों में चल रही खबरों को पूरी तरह से भ्रामक और अफवाह बताया। पार्टी प्रवक्ता अग्रवाल ने कहा कि जो भी भ्रामक खबरें कुछ मीडिया चैनलों में चल रही है वह महागठबंधन की पाटिर्यो एवं एक अन्य हमारी विरोधी पार्टियों के द्वारा योजनाबद्ध तरीके से इस खबर को चलाया गया है।

रालोजपा बोली- बिहार में महागठबंधन का सफाया तय 

पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रवण कुमार अग्रवाल ने कहा कि सभी सांसदों ने कहा है कि वे एनडीए के साथ पूरी मजबुती के साथ केन्द्र एवं बिहार में पशुपति पारस के नेतृत्व में रहेगें और एनडीए को और भी मजबूत बनाने के लिए जो भी कुर्बानी देनी होग, हमलोग देनें के लिए तैयार हैं। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रवण अग्रवाल ने कहा कि 2024 लोकसभा के चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी लोकप्रियता की आंधी में महागठबंधन का पूरी तरह से सफाया हो जायेगा। बिहार की सभी सीटें एनडीए ही जीतेगा। 

इंटरनेट मीडिया के जरिए फैली यह अफवाह 

दरअसल, फेसबुक और ट्व‍िटर जैसे माध्‍यमों पर कुछ लोग शनिवार की सुबह से ही पशुपति पारस की पार्टी में टूट की चर्चा छेड़ने लगे। राजद से नजदीकी वाले कुछ लोगों ने दोपहर बाद रालोजपा के तीन सांसदों के नाम भी इंटरनेट पर साझा करने शुरू कर दिए, जिनके पार्टी छोड़ने का दावा किया गया। हम आपको बता दें कि इनमें से दो सांसदों ने पार्टी छोड़ने की किसी भी संभावना से मना कर दिया है।

Edited By: Shubh Narayan Pathak