32 की उम्र घट कर हुर्इ 15 की 

जीहां भले ही ये उम्र फिजिकली कम ना हुर्इ हो पर ब्रिटेन की एक लड़की एक सुबह जब सो कर उठी तो अपने जीवन के 17 भूल चुकी थी। यानि उस वक्त जब वो 32 साल की थी अपनी याददाश्त में महज 15 साल की रह गर्इ थीं। ये किस्सा 2008 का है जब मैनचेस्टर में रहने वाली नाओमी जैकब्स सो कर उठीं तो वे पहचान ही नहीं पा रही थीं कि वो कौन हैं। वो एक छोटे-से घर में जागीं और पाया कि वो 1992 में रह  रही 15 साल की लड़की है। उस साल उनकी ये कहानी सोशल मीडिया पर जम कर गूंज रही थी। 

अपने आप से अनजान  

डेलीमेल की रिर्पोट के मुताबिक नाओमी को लग रहा था कि वो कोर्इ सपना देख रही हैं। जब उनकी नींद खुली तो वे ना तो अपने कपड़े पहचान पा रही थीं, ना कमरा ना बिस्तर आैर यहां तक कि आर्इने में उन्हें अपना चेहरा तक अजनबी लग रहा था। बोलने पर उन्हें अपनी आवाज भी अजनबी लगी। तब उन्हें अहसास हुआ कि वो मानसिक आैर भावनात्मक रूप से खुद को 15 साल की लड़की पा रही थीं जो साल 1992 में रह रही है लेकिन यह सच नहीं था। सच्चार्इ तो यह थी कि वो 32 साल की थीं आैर 2008 में रह रही थीं। सबसे मुश्किल था इस हक़ीक़त मानना कि वो लियो नाम के एक 10 साल के लड़के की मां हैं। जब वे 15 साल की थीं आैर एक पत्रकार या लेखक बनना चाहती थीं। तब उन्होंने पाया कि वो एक सिंगल पेरेंट थीं, आैर बेरोजगार थीं। उनका खर्च सरकार से मिलता था। उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था कि उनके साथ क्या हो रहा है। 

शुरू की पहचान की तलाश

इसके बाद उन्होंने अपनी ही तलाश शुरू की आैर उन्हें अपने बेड के नीचे एक बक्सा मिला जिसमें अखबार भरे थे। उनसे काफी हद तक अपने सवालों के जवाब मिले। फिर उन्हें अपनी डायरी मिले जिसने कुछ आैर जाले साफ किए। उन्हें पता चला कि उन्हें ड्रग्स की आदत थी और वो बेघर भी हो चुकी थीं। एक बच्चे के रूप में मेरा यौन शोषण हुआ था।  इस बात को 6 साल की उम्र से 25 साल तक की उम्र तक उन्होंने दिल में बंद रखा आैर उसके बाद डायरी में लिखा। इसके अलावा भी अपनी दर्द भरी जिंदगी के कर्इ राज उन्हें उस डायरी में मिले। ये सब पढ़ना बेहद दर्दनाक था। फिर ये समझना बाकी था कि आखिर वो सब भूल क्यों गर्इ आखिर हुअा क्या था। 

मनोचिकित्सक से मांगी मदद

जब नाआेमी को कोर्इ रास्ता नहीं मिला तो वे एक अच्छे मनोचिकित्सक के पास पहुंची आैर उन्हें अपनी परेशानी के बारे में बताया। उसने उनकी ज़िंदगी पर काफ़ी रिसर्च किया, आैर कर्इ दूसरे चिकित्सकों से बात की तब चिकित्सको ने बताया कि उन्हें क्षणिक वैश्विक भूलभुलैया यानि ट्रांजिट ग्लोबल एमनीशिया हुआ है। ये एक दुर्लभ प्रकार का एमनीशिया होता है। जिसमें स्वस्थ मनुष्यों में कुछ समय के लिए स्मृतिलोप होता जो कुछ घंटों या कुछ दिनो तक रह सकता है। डाक्टर ने बताया कि उनकी याददाश्त नहीं खोई थी, लेकिन गंभीर तनाव के चलते उनके दिमाग़ को कोर्इ झटका लगा आैर कुछ हिस्सा वो भूल गर्इं। इसके बाद करीब तीन माह चले उपचार के बाद  एक सुबह, जिस तरह उन्होंने अपनी यादों को खोया था उसी तरह वो वापस आ गर्इं। अपनी इस अनोखी बीमारी आैर अजीब हालत पर अब नाओमी ने किताब 'द फ़ॉरगॉटन गर्ल' लिखी है। 

Posted By: Molly Seth