जागरण संवाददाता, लुधियाना : एक कहावत है 'आग बिना धुआं नहीं'। आपने भी जरूर सुना होगा कि अगर कहीं से धुआं उठ रहा है तो वहां आग जरूर लगी होगी। आजकल शहर में पक्खोवाल रोड पर बन रहे आरओबी (हीरो बेकरी चौक से भाई वाला चौक तक) के दो पिलरों के डिजाइन में किए जा रहे बदलाव को लेकर खूब चर्चा हो रही है। नगर निगम के अधिकारी दो पिलरों की ऊंचाई को बढ़ाकर ब्रिज की ऊंचाई एक जगह बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं लेकिन इस बदलाव की नौबत क्यों आई इसका कारण बताने से बच रहे हैं। छह माह से इन दो पिलरों के कारण आरओबी का काम क्यों ठप पड़ा है। इसके पीछे ऐसी क्या वजह थी कि शहरवासियों पर अधिकारियों ने किसके दबाव में छह माह की परेशानी थोप दी। डेडलाइन बीत जाने के बाद भी आरओबी का काम क्यों पूरा नहीं हो पाया। इन सवालों के जवाब लोगों को देने की जगह अधिकारी अंदरखाते पिलरों की ऊंचाई बढ़ाने में लगे हैं। हालांकि चर्चा यह है कि एक आइएएस अधिकारी के रिश्तेदार की इमारत इसके पास है। पिलरों के गार्डर में बदलाव के लिए अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है। अगर पिलरों की ऊंचाई बढ़ा दी जाएगी तो पुल के उस हिस्से के नीचे आसानी से वाहनों को पार्क किया जा सकेगा। इसी बदलाव को लेकर शुक्रवार को चंडीगढ़ से इंजीनियर्स की एक टीम भी लुधियाना पहुंची थी। बताया जा रहा है कि टीम के साथ बैठक के बाद इस बदलाव को लगभग फाइनल कर दिया गया है।

गौरतलब है कि स्मार्ट सिटी योजना के तहत पक्खोवाल रोड पर 120 करोड़ रुपये से रेलवे फाटक पर दो रेलवे अंडर ब्रिज और एक रेलवे ओवर ब्रिज तैयार किए जाने प्रस्तावित थे। सिधवां नहर की ओर से हीरो बेकरी चौक की ओर 839.83 मीटर लंबा आरओबी और हीरो बेकरी से सिधवां नहर की ओर 458.20 मीटर लंबा आरयूबी बन रहा है। एक अन्य आरयूबी 1018.46 मीटर लंबा है जो सिधवां नहर से निगम के जोन डी की ओर बनकर तैयार हो चुका है। आरओबी का काम अभी लटका हुआ है। हालांकि इसे पूरा करने की डेडलाइन 31 अगस्त, 2021 तक थी। डेडलाइन को बीते एक साल बीत चुका है लेकिन फिर भी इसका निर्माण अधूरा है। जानकारों के अनुसार जिस गति से काम चल रहा है उसके हिसाब से इसे बनने में अब भी छह माह का समय और लग सकता है। पिलरों के डिजाइन में बदलाव से बढ़ेगा दो करोड़ का बोझ :

हीरो बेकरी चौक से भाईवाला चौक की ओर आने वाले रोड पर ओवरब्रिज का एक हिस्सा मिलेगा। जहां पर ब्रिज का रैंप उतरना है, वहां के दो पिलरों का काम छह माह से बंद है। इन दोनों पिल्लर के पास एक आइएएस अधिकारी के रिश्तेदार की इमारत है। सूत्रों के अनुसार इस बदलाव से नगर निगम पर करीब दो करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। निगम के अधिकारी भी इस बदलाव के पक्ष में नहीं है। अगर इसमें बदलाव होता है तो उन्हें इसका कारण भी बताना होगा। ऐसे में दो करोड़ रुपये बर्बादी का हिसाब कौन देगा। केंद्र सरकार के पास करेंगे शिकायत:

काउंसिल आफ इंजीनियर्स के अध्यक्ष कपिल अरोड़ा का कहा है कि उन्हें भी इस तरह की सूचनाएं मिल रही हैं कि पक्खोवाल रोड की ओर उतरने वाले आरओबी के डिजाइन में बदलाव किया जा रहा है। हैरानी की बात है कि इसके निर्माण की समयसीमा समाप्त होने के बाद डिजाइन में बदलाव किया जा रहा है। नगर निगम अधिकारियों को यह सार्वजनिक करना चाहिए कि पहले के डिजाइन में क्या खामी थी। अगर डिजाइन में बदलाव किया जाता है तो इसका फायदा ठेकेदार को भी मिलेगा। डेडलाइन निकलने का बहाना उसे मिल जाएगा। दाल में कुछ काला तो जरूर है। उनकी संस्था केंद्र सरकार के पास इसकी शिकायत करेगी।

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कोट्स :

चंडीगढ़ से इंजीनियर्स को आरओबी को देखने के लिए बुलाया गया था। इसमें केवल आरओबी के गार्डर की ऊंचाई बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं। इसे ब्रिज के डिजाइन में किसी तरह का बदलाव नहीं कह सकते हैं। मेरे हिसाब से गार्डर की ऊंचाई बढ़ाने पर कोई खर्च नहीं होगा। इसे स्पैन को गार्डर में बदलाव कह सकते हैं।

- संजय कंवर, नोडल अफसर स्मार्ट सिटी ---

यह मामला मेरे ध्यान में अभी तक नहीं आया है। इस बारे में अधिकारियों से पूछा जाएगा कि आखिर बदलाव क्यों किया जा रहा है। यह भी पूछा जाएगा कि छह माह से इसका काम बंद क्यों है। अधिकारियों को इसका जवाब देना होगा कि लोगों की परेशानी का जिम्मेदार कौन है। इस पूरे मामले की जांच की जाएगी।

- इंदरबीर निज्जर, स्थानीय निकाय मंत्री पंजाब

Edited By: Jagran