EPF से बीमारी-शादी के लिए अब निकाल सकेंगे पूरा पैसा, केंद्र ने 1952 की व्यवस्था बदलकर लागू की नई योजना
केंद्र सरकार ने 29 जून से नई ईपीएफ योजना लागू की है, जिसके तहत नौकरीपेशा लोग बीमारी, शादी या शिक्षा ...और पढ़ें

ईपीएफओ को लेकर केंद्र ने बदली 1952 की व्यवस्था। (फाइल फोटो)
HighLights
नई ईपीएफ योजना 29 जून से हुई लागू।
बीमारी, शादी, शिक्षा जैसी जरूरतों के लिए 75% तक निकासी।
निकासी के बाद खाते में 25% न्यूनतम बैलेंस रखना अनिवार्य।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अब नौकरीपेशा लोग बीमारी, शिक्षा, शादी और घर जैसी जरूरतों के लिए अपने खाते से पात्र राशि (75%) का 100% तक पैसा निकाल सकेंगे। केंद्र सरकार ने पुरानी 1952 की व्यवस्था को बदलकर अब सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत 29 जून से देश में नई ईपीएफ योजना लागू की है।
पहले की जटिलताएं खत्म कर केवल तीन बड़ी श्रेणियां बनाई गई हैं। हालांकि, निकासी के बाद खाते में कुल जमा योगदान का 25% न्यूनतम बैलेंस बचना जरूरी है। यानी कुल फंड के 75% हिस्से को ही पात्रता माना गया है, जिसे जरूरत पर पूरा निकाला जा सकता है।
कितनी रहेगी पीएफ योगदान की दर?
अनिवार्य पीएफ योगदान की दर बिना किसी बदलाव के 12% ही रहेगी, जबकि अधिसूचित श्रेणियों के लिए यह 10% होगी। महामारी या राष्ट्रीय आपदा के समय सरकार इस योगदान को तीन महीने तक टाल या कम कर सकती है।
कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी?
लेनदेन के लिए सदस्यों का आधार, पैन और लिंक बैंक खाता अनिवार्य है। तय वेतन सीमा से अधिक वाले कर्मचारी अनिवार्य ईपीएफ कवरेज से बाहर रहेंगे। दोनों की सहमति पर योगदान सीमा तक सीमित रहेगा या वे स्वेच्छा से अधिक भुगतान कर सकेंगे।
कंपनियों को 15 दिनों में भरना होगा रिटर्न
नियोक्ताओं के लिए ठेकेदार अनुपालन, ओनरशिप का खुलासा और इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग अनिवार्य है। प्राइवेट पीएफ ट्रस्टों की रिपोर्टिंग की सख्त निगरानी होगी। कंपनियों को 15 दिनों में रिटर्न भरना होगा। छूटे कर्मचारियों के लिए ईईसी 2026, पुराने मुकदमों के लिए विश्वास 2026 और एमनेस्टी 2026 शुरू हुई है।
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