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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 05, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

संसद में 33 प्रतिशत महिलाएं नहीं होंगी तो वे सशक्त कैसे बनेंगी : राष्ट्रपति

By Sachin BajpaiEdited By:
Published: Sat, 05 Mar 2016 04:38 PM (GMT+05:30)Updated: Sat, 05 Mar 2016 08:01 PM (GMT+05:30)

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शनिवार को कहा कि अगर संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण नहीं दिया ...और पढ़ें

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नई दिल्ली।राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने महिला आरक्षण विधेयक पर सभी दलों को नसीहत दी है। राष्ट्रपति ने कहा कि संसद और विधानसभा में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने वाला विधेयक जल्द से जल्द पास होना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि लंबे समय से लंबित इस बिल का पास न होना दुर्भाग्यपूर्ण हैं। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित महिला प्रतिनिधियों के कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने यह बातें कही।

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राष्ट्रपति ने कहा कि इसे पास कराने का असली संकल्प राजनीतिक दलों को ही दिखाना होगा। उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने भी विधेयक को पास कराने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि अब इस विधेयक को और नहीं रोका जाना चाहिए। साथ ही राजनीतिक दलों से अधिक से अधिक महिलाओं को चुनाव में टिकट देने की अपील की।

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रणब मुखर्जी ने कहा कि लोकसभा में दो तिहाई बहुमत से महिला आरक्षण विधेयक पास होने के बाद राज्यसभा में लंबित है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण और संविधान प्रदत्त समानता के अधिकार के लिए यह बिल महत्वपूर्ण है।

अवसर मिले तो बनाती हैं बेहतरी का रास्ता
उन्होंने कहा कि यह देखना महत्वपूर्ण है कि जब अवसर दिया जाता है तब महिलाएं किस प्रकार से समाज को बेहतर बनाने का रास्ता तैयार कर देती हैं। आज पंचायतों एवं स्थानीय निकायों में 12.70 लाख निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं और वे काफी अच्छा काम कर रही हैं। कई राज्यों में पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण को 33 प्रतिशत से ब़़ढाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है और कई राज्य इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं।

भारत 109वें स्थान पर
उन्होंने कहा कि महिलाओं को संसद एवं विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व देने के संबंध में दुनिया के 190 देशों में भारत का 109वां स्थान है। यह स्थिति बदलनी चाहिए।

राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की तारीफ की, कहा मोदी जो कहते हैं करते हैं
राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस बात के लिए तारीफ की कि उन्होंने सत्ता में आने के बाद बेटी बचाओ, बेटी प़़ढाओ का नारा दिया और इस दिशा में पहल भी की। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मोदी की मौजूदगी की भी राष्ट्रपति ने तारीफ करते हुए कहा कि वह यहां कोई सलाह या भाषषण देने नहीं आए हैं लेकिन उनकी यहां मौजूदगी स्पष्ट करती है कि वह जो कहते हैं, करते हैं। प्रधानमंत्री यहां एक घंटे से मौजूद हैं जो बताता है कि वह इस विषषय के प्रति कितने प्रतिबद्ध हैं।