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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 16, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Supreme Court: 19 दिसंबर से सुप्रीम कोर्ट में दो हफ्ते का शीतकालीन अवकाश, इस दौरान बंद रहेगा काम

By Jagran NewsEdited By: Devshanker Chovdhary
Published: Fri, 16 Dec 2022 11:59 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार से दो सप्ताह के लिए शीतकालीन अवकाश शुरू हो गया है जो कि एक जनवरी तक ...और पढ़ें

19 दिसंबर से सुप्रीम कोर्ट में दो हफ्ते का शीतकालीन अवकाश।
19 दिसंबर से सुप्रीम कोर्ट में दो हफ्ते का शीतकालीन अवकाश।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार से दो सप्ताह के लिए शीतकालीन अवकाश शुरू हो गया है जो कि एक जनवरी तक चलेगा। शीतकालीन अवकाश के दौरान मुकदमों की सुनवाई नहीं होगी और न ही कोई पीठ मामलों की सुनवाई के लिए बैठेगी। शुक्रवार को सीजेआइ डीवाई चंद्रचूड़ ने कोर्ट में मौजूद वकीलों से कहा कि कल से यानी शनिवार से एक जनवरी तक शीतकालीन अवकाश के दौरान केस की सुनवाई के लिए कोई पीठ नहीं होगी। कोर्ट की छुट्टियों को लेकर संसद में उठे सवालों और कानून मंत्री किरण रिजिजू के संसद में दिए गए बयान को देखते हुए प्रधान न्यायाधीश चंद्रचूड़ की घोषणा महत्वपूर्ण हो जाती है।

हालांकि, पूर्व में भी शीतकालीन अवकाश में मुकदमों की सुनवाई के लिए अवकाशकालीन पीठ नही बैठती थी। अवकाशकालीन पीठें सिर्फ गर्मी की लंबी छुट्टियों के दौरान ही बैठती हैं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे हमेशा अर्जेंट मामलों के लिए खुले रहते हैं। कभी भी किसी भी मामले में अर्जेंसी होने पर मामला वेकेशन रेजिस्ट्रार के समक्ष मेंशन किया जा सकता है। वेकेशन रेजिस्ट्रार मामले की तात्कालिकता को देखते हुए केस की जानकारी सीजेआइ को देते हैं और अगर मामला बहुत अर्जेंट हुआ तो सीजेआइ उस केस पर सुनवाई करने के लिए विशेष पीठ गठित करते है, जोकि मामले की सुनवाई करती है।

सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में होने वाली लंबी छुट्टियां अक्सर चर्चा का मुद्दा बनती हैं और कई बार इनमें कमी करने की मांग उठ चुकी है। गुरुवार 15 दिसंबर को राज्यसभा में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में होने वाली लंबी छुट्टियों का मुद्दा उठा था और लंबित मुकदमों के ढेर को देखते हुए अदालत के अवकाश दिवसों में कमी करने की मांग हुई थी। कोर्ट की छुट्टियों से संबंधित सवाल का जवाब देते हुए विगत गुरुवार को राज्यसभा में कानून मंत्री किरण रिजिजू ने कहा था कि देश के लोग महसूस करते हैं कि अदालतों में होने वाली लंबी छुट्टियां न्याय की मांग करने वालों के लिए सुविधाजनक नहीं हैं।

कानून मंत्री ने कहा था कि वे सदन की भावना न्यायपालिका को बताएंगे। हालांकि सदन में कानून राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल ने कहा था कि न्यायालयों की छुट्टियां कम करने या समाप्त करने में केंद्र सरकार की कोई भूमिका नहीं है। यह न्यायपालिका के क्षेत्राधिकार से संबंधित है। सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 145 के तहत और हाई कोर्ट अनुच्छेद 225 के तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए कोर्ट के कामकाज और सुविधाओं के संबंध में नियम बनाता है। इसी में उसकी बैठकें और अवकाश शामिल हैं। लेकिन जैसे कि हमेशा लंबित मुकदमों की चर्चा होती है और लंबित मुकदमों की संख्या पांच करोड़ होने जा रही है, इस पर बात करने में कोई हर्ज नहीं है।

राज्यमंत्री ने कहा था कि कोर्ट में ग्रीष्मकालीन अवकाश सात सप्ताह यानी 49 दिनों के होते हैं। इसके अलावा शीतकालीन अवकाश, होली और दीपावली की छुट्टी पांच-छह दिन की छुट्टी तथा अन्य राजपत्रित अवकाश भी होते हैं। सुप्रीम कोर्ट में शनिवार और रविवार को भी कार्य दिवस नहीं होता है। उन्होंने कहा था कि हम सबकी, सरकार की और अदालत की यही मंशा है कि लंबित मामले कम हों और लोगों को त्वरित न्याय मिल सके।

उपरोक्त विचार सरकार और सदन के थे लेकिन सरकार के अलावा अगर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की छुट्टियों पर न्यायपालिका की समय-समय पर व्यक्त की गई राय देखी जाए, तो जुलाई में तत्कालीन सीजेआइ एनवी रमणा ने जस्टिस एसबी सिन्हा मेमोरियल लेक्चर के दौरान रांची में कहा था कि लोगों में ये गलतफहमी है कि जज बहुत आराम में रहते हैं और अपनी छुट्टियों का आनंद लेते हैं। जज केवल 10 बजे से चार बजे तक काम करते हैं और अपनी छुट्टियों का आनंद उठाते हैं। ये धारणा सही नहीं है।

उन्होंने कहा था कि हम लगातार काम करते हैं यहां तक कि साप्ताहिक अवकाश और छुट्टियों के दौरान भी काम करते हैं। जस्टिस रमणा की ही तरह दिल्ली हाई कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश जयंत नाथ ने पिछले वर्ष नवंबर में कहा था कि लोगों में ये जो धारणा है कि कोर्ट भी स्कूलों की तरह छुट्टियों पर जाते हैं, ये सही धारणा नहीं है। उनकी कड़ी मेहनत को दर्शाने के लिए और इस छवि को बदलने के लिए उचित तंत्र को एंगेज किया जाना चाहिए।

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