विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'पत्नी को पति की इनकम के बारे में जानने का हक', भरण-पोषण से जुड़े मामले में CIC का अहम फैसला

Published: Tue, 27 Jan 2026 09:07 PM (GMT+05:30)

केंद्रीय सूचना आयोग ने फैसला सुनाया है कि भरण-पोषण के मुकदमों में पत्नी को पति की आय की सामान्य जानकारी ...और पढ़ें

पत्नी को भरण-पोषण हेतु पति की आय की जानकारी मिलेगी।

पत्नी को भरण-पोषण हेतु पति की आय की जानकारी मिलेगी।

HighLights

  1. पत्नी को भरण-पोषण हेतु पति की आय की जानकारी मिलेगी।

  2. CIC ने आयकर विभाग को सामान्य आय विवरण देने का निर्देश दिया।

  3. आयकर रिटर्न की प्रतियां या संवेदनशील जानकारी साझा नहीं होगी।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने एक अहम फैसले में कहा है कि भरण-पोषण के मुकदमे के लिए पत्नी को पति की आय से जुड़ी सामान्य जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है और इसे गोपनीयता के आधार पर रोका नहीं जा सकता।

सूचना आयुक्त विनोद कुमार तिवारी द्वारा पारित आदेश में आयोग ने आयकर विभाग को निर्देश दिया कि यदि वैवाहिक संबंध और अदालत में लंबित भरण-पोषण या वैवाहिक विवाद की पुष्टि हो जाती है, तो पति की सकल आय या करयोग्य आय का सामान्य विवरण पत्नी को दिया जाए।

हालांकि, आयोग ने स्पष्ट किया कि आयकर रिटर्न की प्रतियां और अन्य व्यक्तिगत या संवेदनशील जानकारी साझा नहीं की जाएगी। यह मामला उस महिला से जुड़ा था, जिसने आरोप लगाया कि उसका पति जानबूझकर अपनी वास्तविक आय छिपा रहा है ताकि भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बच सके।

पत्नी को पति की आय के बारे में जानने का हक 

महिला ने RTI के तहत पिछले पांच आकलन वर्षों की आय संबंधी जानकारी मांगी थी, जिसे आयकर विभाग ने सुचना का अधिकार (RTI) अधिनियम की धारा 8(1)(जे) का हवाला देकर तीसरे पक्ष की निजी जानकारी बताते हुए खारिज कर दिया था।

अपील स्वीकार करते हुए आयोग ने कहा कि जब आय से जुड़ी जानकारी कानूनी रूप से विवाहित पत्नी द्वारा भरण-पोषण के लिए मांगी जाती है, तो वह पूरी तरह निजी नहीं रह जाती।

आयोग ने पत्नी को निर्देश दिया कि वह अपने वैवाहिक संबंध और अदालत में लंबित मामले से जुड़े दस्तावेज पहले प्रस्तुत करे।

CIC का आयकर विभाग को आय विवरण देने का निर्देश

इसी तरह के एक अन्य आदेश में भी सीआइसी ने कहा कि परित्यक्ता पत्नी को भरण-पोषण के मुकदमे के प्रभावी निपटारे के लिए पति की आय से जुड़ी सीमित जानकारी पाने का अधिकार है, क्योंकि यह उसकी आजीविका से सीधे जुड़ा मामला है।

हालांकि, आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि बैंक से जुड़ी वित्तीय जानकारियों के मामले में अलग मानक लागू होंगे।

स्टेट बैंक आफ इंडिया से जुड़े मामलों में CIC ने बैंक लाकर, बैलेंस और जमा राशि से जुड़ी जानकारी को 'फिड्यूशियरी कैपेसिटी' में रखी गई तीसरे पक्ष की निजी जानकारी मानते हुए इनके खुलासे से इनकार किया।

फिड्यूशियरी कैपेसिटी के तहत बैंक अपने ग्राहकों की जानकारियों को गोपनीय रखने को बाध्य होता है।