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'सिद्धिविनायक मंदिर में हुई लूट के विरुद्ध क्यों नहीं की गई कोई कार्रवाई', एकनाथ शिंदे का उद्धव सेना पर पलटवार

Published: Sat, 11 Jul 2026 05:33 AM (IST)Updated: Sat, 11 Jul 2026 07:48 AM (IST)

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर हमलावर शिवसेना (यूबीटी) पर पलटवार करते हुए महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ ...और पढ़ें

'सिद्धिविनायक मंदिर में हुई लूट के विरुद्ध क्यों नहीं की गई कोई कार्रवाई', एकनाथ शिंदे (फोटो- एक्स)

'सिद्धिविनायक मंदिर में हुई लूट के विरुद्ध क्यों नहीं की गई कोई कार्रवाई', एकनाथ शिंदे (फोटो- एक्स)

HighLights

  1. राम मंदिर चढ़ावा चोरी को लेकर हमलावर शिवसेना (यूबीटी) पर किया पलटवार

  2. उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री रहते नियुक्त किए थे सिद्धि विनायक मंदिर ट्रस्ट के सदस्य

पीटीआई, मुंबई। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर हमलावर शिवसेना (यूबीटी) पर पलटवार करते हुए महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शुक्रवार को सवाल किया कि तत्कालीन प्रदेश सरकार ने प्रख्यात सिद्धिविनायक मंदिर में हुई "लूट" की जांच का आदेश क्यों नहीं दिया था।

मानसून सत्र के आखिरी दिन विधान परिषद में शिंदे ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर में कथित गबन से भक्तों को दुख पहुंचा है और इस मामले में दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

शिंदे ने कहा, "राम मंदिर में जो हुआ, उसका कोई समर्थन नहीं कर सकता। प्रधानमंत्री मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ किसी को नहीं बख्शेंगे।"

उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) और उसके प्रमुख उद्धव ठाकरे का नाम लिए बिना आरोप लगाया कि उनके सहयोगियों ने देश के सबसे अमीर मंदिरों में से एक सिद्धिविनायक मंदिर को लूटने का पाप किया था। (तत्कालीन) सरकार ने जांच का आदेश क्यों नहीं दिया था?"

गौरतलब है कि जब उद्धव ठाकरे 2019 से 2022 तक मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों की नियुक्ति की थी। शिंदे उनकी सरकार का हिस्सा थे। जून 2022 में उन्होंने बगावत करके सरकार गिरा दी थी। शिंदे ने याद दिलाया कि महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने उस समय सिद्धिविनायक मंदिर में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया था।

'दोषी मिलूं तो मंदिर के सामने फांसी दे देना'

सीएम शिंदे के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए श्री सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष रहे मराठी अभिनेता आदेश बांदेकर ने कहा कि अगर वह किसी भी अनियमितता के दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें मंदिर के सामने फांसी दी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा, "मेरा कार्यकाल खत्म हुए तीन वर्ष हो चुके हैं। करीब चार वर्ष पहले राज्य विधानसभा के सत्र के दौरान भी ऐसा ही मामला सामने आया था। सभी कार्यकारी अधिकारियों को मंत्रालय (राज्य सचिवालय) द्वारा नियुक्त किया जाता है। अगर कोई गड़बड़ी थी, तो उन्हें इसे उजागर करना चाहिए था।"

बांडेकर पहले एकीकृत शिवसेना से जुड़े हुए थे। उन्होंने कहा कहा कि पिछले तीन वर्ष से कोई और व्यक्ति ट्रस्ट का प्रमुख है और आशंका जताई कि संबंधित दस्तावेज से छेड़छाड़ की जा सकती है।

गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने जुलाई, 2020 में बांडेकर को दूसरे कार्यकाल के लिए ट्रस्ट का चेयरमैन फिर नियुक्त किया था।

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