सड़क हादसे में गाड़ी का इंश्योरेंस न होने पर मुआवजा क्यों नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की सड़क दुर्घटना मुआवजा योजना पर सवाल उठाया है, जिसमें केवल बीमा वाले वाहन शामिल हैं।

बिना बीमा वाली गाड़ियों पर मुआवजा क्यों नहीं दे रही सरकार? (AI जेनरेटेड फोटो)
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने बिना बीमा वाहनों को मुआवजा योजना से बाहर करने पर सवाल उठाया।
सरकार बीमा वाले वाहनों से हुई मृत्यु पर 2 लाख, गंभीर चोट पर 1 लाख देगी।
योजना मोटर वाहन अधिनियम के प्रविधानों के तहत तैयार की गई है।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में सड़क दुर्घटनाओं के कारण कई लोगों की जान चली जाती है। केंद्र सरकार ऐसे ही परिवारों को आर्थिक मदद के लिए मुआवजा देने की योजना बना रही है।
सरकार की यह योजना केवल उन दुर्घटनाओं के लिए है जिनमें बीमा वाले वाहन शामिल हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है कि यह योजना बिना बीमा वाले वाहनों के लिए क्यों नहीं रखी जा रही।
बिना बीमा वाले वाहनों के लिए मुआवजा क्यों नहीं?
केंद्र सरकार सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वालों के परिवारों को 2 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायल लोगों को 1 लाख रुपये की अंतरिम आर्थिक सहायता देने की योजना बना रही है।
सुप्रीम कोर्ट के इस सवाल पर कि इस योजना में केवल बीमा वाले वाहन ही क्यों शामिल हैं, अधिकारियों ने कहा कि इसे मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) के उन प्रविधानों के तहत तैयार किया गया है जो बीमा वाले वाहनों से संबंधित हैं। अगर दोषी का वाहन बिना बीमा वाला है, तो मामला 'मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण' (MACT) के पास जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने योजना की धारा 6 की समीक्षा की। इसमें बताया गया है कि पीड़ित या मृतक के कानूनी उत्तराधिकारी एक तय ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन कर सकते हैं। उन्हें MACT में दायर किए गए या लंबित दावों का विवरण देना होगा।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने सरकार को निर्देश दिया कि वह लोगों को जागरूक करने के लिए इसका प्रचार-प्रसार करे। कोर्ट ने कहा कि लोगों को अंतरिम मुआवजे की मांग करने के अपने अधिकार के बारे में पता होना चाहिए।
बीमा कंपनी को देने होंगे 5 लाख रुपये
अधिकारियों ने बताया कि अधिनियम की धारा 164, जो मौत या गंभीर चोट के मामलों में मुआवजे से संबंधित है। इसके तहत 'नो-फॉल्ट लायबिलिटी' (बिना गलती के दायित्व) का प्रविधान है।
इसके अनुसार, वाहन मालिक या बीमा कंपनी को मौत के मामले में 5 लाख रुपये और गंभीर चोट के मामले में 2.5 लाख रुपये का भुगतान करना होता है। इसके तहत दावा करने वाले को यह साबित करने की जरूरत नहीं है कि मौत या चोट, वाहन मालिक की किसी गलती, लापरवाही या चूक के कारण हुई है।
एक अधिकारी ने कहा, 'इसलिए, तत्काल राहत के तौर पर मौत के लिए 2 लाख रुपये और गंभीर चोट के लिए 1 लाख रुपये की अंतरिम सहायता तय की गई है। MACT के आदेश के आधार पर अंतिम मुआवजा इससे अधिक हो सकता है।'
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि इस योजना को 'केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम' (Central Motor Vehicle Act) के प्रविधानों के तहत अधिसूचित किया जाएगा।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मंत्रालय ने 23 फरवरी को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ इस योजना को साझा किया था। सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2025 में ही मंत्रालय को यह योजना तैयार करने का निर्देश दिया था।
