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'लोकतंत्र पर भरोसा बनाए रखना जरूरी', सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश निकाय चुनाव में दिखाया कड़ा रुख; चुनाव आयोग को सुरक्षा के निर्देश

Published: Wed, 21 Oct 2026 11:44 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनावों में YSRCP उम्मीदवारों की नामांकन संबंधी शिकायतों पर राज्य निर्वाचन आयोग को विचार करने का निर्देश दिया है।

YSRCP उम्मीदवारों के नामांकन में बाधा पर SC गंभीर।

YSRCP उम्मीदवारों के नामांकन में बाधा पर SC गंभीर।

HighLights

  1. YSRCP उम्मीदवारों के नामांकन में बाधा पर SC गंभीर।

  2. राज्य निर्वाचन आयोग को शिकायतों पर विचार का निर्देश।

  3. निष्पक्ष चुनाव हेतु सुरक्षा और सूची प्रकाशन स्थगित।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 'लोकतंत्र की जीवंतता और उसकी विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए यह बेहद आवश्यक है कि चुनाव प्रक्रिया पर जनता का पूरा भरोसा कायम रहे।' इसी भावना को सर्वोपरि रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर एक अहम कदम उठाया है।

कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया है कि वह वाईएसआरसीपी के उन उम्मीदवारों की शिकायतों पर गंभीरता से विचार करे, जिन्हें हिंसा और धमकियों के चलते अपने नामांकन पत्र दाखिल करने से कथित रूप से रोका गया था।

जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की अवकाश पीठ ने सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया कि 'हालांकि संवैधानिक अदालतें आम तौर पर चुनावी प्रक्रिया में सीधे हस्तक्षेप करने से बचती हैं, लेकिन जब बात निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने की हो, तो वे मूकदर्शक नहीं रह सकतीं।'

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव भारतीय संविधान के मूल ढांचे का अहम हिस्सा हैं। नामांकन दाखिल करने का अधिकार इसी प्रक्रिया का एक बेहद जरूरी पहलू है। कोर्ट ने पाया कि वाईएसआरसीपी ने अपने पक्ष में प्रथम दृष्टया ऐसे पर्याप्त सबूत और दस्तावेज पेश किए हैं, जिनमें वीडियो क्लिपिंग और भौतिक व इलेक्ट्रानिक शिकायतें शामिल हैं।

इन साक्ष्यों से यह बात सामने आई कि राज्य के लगभग 100 शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान विपक्षी दल के कई उम्मीदवारों को डराया-धमकाया गया और उन्हें नामांकन केंद्रों तक पहुंचने से रोका गया।

कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को यह भी निर्देश दिया है कि वह उम्मीदवारों की अंतिम सूची के प्रकाशन को 25 अक्टूबर तक के लिए स्थगित रखे। इसके साथ ही, आयोग को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी उम्मीदवारों के मन से डर और आशंकाएं पूरी तरह दूर हों। पीठ ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को यह सख्त आदेश दिया है कि वह चुनाव कार्यालयों और सभी उम्मीदवारों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराएं ताकि वे सुरक्षित माहौल में अपनी लोकतांत्रिक भूमिका निभा सकें।

राज्य सरकार के वकीलों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि कोर्ट को चुनाव प्रक्रिया में दखल नहीं देना चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि जब कानून-व्यवस्था और हिंसा के साए में लोकतंत्र की निष्पक्षता खतरे में पड़े, तो संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना कोर्ट का कर्तव्य बन जाता है।

इस पूरे मामले में कोर्ट ने निर्वाचन आयोग को आदेश दिया है कि वह शिकायतों पर विचार कर गुरुवार तक अपना फैसला ले और आगामी 27 अक्टूबर को अपनी अनुपालन रिपोर्ट पेश करे।

सोर्स- न्यूज एजेंसी PTI के इनपुट के अनुसार