बंगाल की खाड़ी में एक के बाद एक क्यों आ रहे समुद्री तूफान? 1970 वाले कनेक्शन का रिपोर्ट में खुलासा
बंगाल की खाड़ी में लगातार मौसमी सिस्टम सक्रिय हो रहे हैं, जिससे चक्रवातों की तीव्रता बढ़ रही है। जलवायु परिवर्तन ...और पढ़ें

बंगाल की खाड़ी में तूफानों की बढ़ती संख्या

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
अरविंद शर्मा, नई दिल्ली। अर्णब तूफान के पस्त पड़ते ही बंगाल की खाड़ी में दूसरा मौसमी सिस्टम सक्रिय हो गया है। अंडमान सागर के ऊपर बना निम्न दबाव का क्षेत्र शनिवार तक अधिक तीव्र होकर आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ सकता है। हालांकि, यह अर्णब जैसा उग्र नहीं होगा, लेकिन एक के बाद एक मौसमी सिस्टम का सक्रिय होना बंगाल की खाड़ी के खतरनाक होते जाने की ओर संकेत करता है।
जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र का तापमान बढ़ने और ऊपरी परत के गर्म होने से तूफानों को अधिक ऊर्जा मिलने लगी है। मौसम विज्ञानियों का मानना है कि हाल के वर्षों में चक्रवातों की तीव्रता बढ़ने लगी है, जिसके चलते ओडिशा, बंगाल, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।
ब्रिटेन की पत्रिका साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार बंगाल की खाड़ी विश्व के सबसे सक्रिय चक्रवाती क्षेत्रों में तब्दील होती जा रही है। वर्ष 1982 से 2022 के बीच हिंद महासागर में बने चक्रवातों में लगभग 75 प्रतिशत बंगाल की खाड़ी में विकसित हुए हैं। स्काईमेट के उपाध्यक्ष महेश पलावत का मानना है कि बंगाल की खाड़ी में चक्रवातों का सबसे संवेदनशील समय मानसून के बाद का है।
आइएमडी के अनुसार बंगाल की खाड़ी में हर वर्ष औसतन 7.8 चक्रवाती विक्षोभ विकसित होते हैं। हालांकि सारे के सारे चक्रवात में नहीं बदलते। चार दशकों के दौरान यहां विकसित 116 मौसमी तंत्र चक्रवाती तूफान में बदल गए।
चक्रवात बनने और मजबूत होने में समुद्र के तापमान की अहम भूमिका होती है। समुद्री सतह का तापमान 26.5 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होने पर चक्रवात बनने की स्थितियां उत्पन्न होती हैं। गर्म समुद्र में वाष्प ज्यादा होता है। नमी के ऊपर उठकर संघनित होने पर चक्रवात को ऊर्जा मिलती है। समुद्र में गर्म पानी की परत जितनी गहरी होगी, तूफान को उतनी देर तक ऊर्जा मिल सकती है।
अध्ययन बताता है कि 1982 से 2022 के बीच बंगाल की खाड़ी में समुद्र की सतह के तापमान में 0.66 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है। ऊपरी सौ मीटर परत भी 0.54 डिग्री सेल्सियस गर्म हुई है। खाड़ी की भौगोलिक बनावट से भी ऐसा हो रहा है। गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियों के जरिए बड़ी मात्रा में मीठा पानी पहुंचता है। इससे ऊपरी परत में खारापन कम रहता है और नीचे के हिस्से में मिश्रण भी नहीं हो पाता। नतीजतन सतह पर गर्म पानी की परत लंबे समय तक बनी रहती है। इससे चक्रवातों को ज्यादा ऊर्जा मिलने लगी है।
अध्ययन में मानसून पूर्व और मानसून बाद के तूफानों की अधिकतम हवा की गति में भी वृद्धि दर्ज की गई है। इसका अर्थ है कि चक्रवातों की संख्या बढ़ने से अधिक गंभीर चुनौती उनका तेजी से शक्तिशाली होना है।
बंगाल की खाड़ी के तापमान में वृद्धि
अवधि - औसत तापमान (डिग्री सेल्सियस में)
1970-1979 - 28.39
1980-1989 - 28.86
1990-1999 - 29.31
2000-2010 - 29.39
(स्रोत-केंद्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान)
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