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FCRA संशोधन विधेयक क्यों जरूरी है? गृह मंत्रालय ने JPC की बैठक में गिनाए कारण

Published: Sat, 19 Sep 2026 10:04 AM (IST)

गृह मंत्रालय ने 'विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक' (FCRA) का बचाव करते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा कानून है।

गृह मंत्रालय ने FCRA संशोधन विधेयक पर समिति को बताए कारण

गृह मंत्रालय ने FCRA संशोधन विधेयक पर समिति को बताए कारण

HighLights

  1. गृह मंत्रालय ने FCRA संशोधन विधेयक का बचाव किया।

  2. राष्ट्रीय और आंतरिक सुरक्षा को विधेयक का आधार बताया।

  3. विधेयक किसी समुदाय को निशाना नहीं बनाता: गृह मंत्रालय।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 'विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक' (FCRA Amendment Bill) को लेकर विपक्ष लगातार हमला कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि ये विधेयक अल्पसंख्यकों, खासकर ईसाइयों द्वारा चलाए जा रहे संस्थानों को निशाना बनाता है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस आरोप का जवाब देते हुए शुक्रवार, 18 सितंबर को कहा कि ये संशोधन चैरिटी को नियंत्रित नहीं करते, बल्कि संप्रभु क्षेत्र में विदेशी पैसे के प्रवेश को नियंत्रित करते हैं, जिसकी रक्षा करने का केंद्र को पूरा अधिकार है।

FCRA पर गृह मंत्रालय ने दी जानकारी

गृह मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि यह कानून मूल रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा कानून है। फिलहाल इस विधेयक की जांच संसद की संयुक्त समिति कर रही है।

मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि गृह सचिव गोविंद मोहन के नेतृत्व में समिति को विधेयक के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी दी गई है।

समिति की पहली बैठक शुक्रवार को हुई। बैठक के दौरान सांसदों ने कई सवाल पूछे, जिनका जवाब देते हुए मोहन ने जोर देकर कहा कि यह विधेयक किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हित, आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताएं इस विधेयक के मुख्य कारण हैं।

बैठक के बाद, समिति के अध्यक्ष संजय जायसवाल ने भरोसा जताया कि समिति संसद के शीतकालीन सत्र में अपनी रिपोर्ट सौंप देगी।

सरकार ने इसे संसद के बजट सत्र में पेश किया था और विपक्षी दलों तथा ईसाई समूहों के कड़े विरोध के बीच जांच के लिए समिति को भेज दिया गया। इन समूहों ने अपनी चिंताएं बताने के लिए गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात भी की थी।

सरकार और विपक्ष के बीच FCRA पर तकरार

भारतीय जनता पार्टी के नेता निशिकांत दुबे ने कहा कि भारत में राष्ट्रीय हित के मुद्दों को प्रभावित करने के लिए विदेशी पैसे के इस्तेमाल का इतिहास रहा है। 

निशिकांत दुबे ने सवाल किया कि जब 1976 में FCRA कानून बनने से पहले विदेशी फंडिंग से जुड़े 1,400 से अधिक NGO को अलग-अलग कानूनों के तहत बंद कर दिया गया था, तो फोर्ड फाउंडेशन को लोधी एस्टेट में प्रमुख संपत्ति क्यों दी गई।

बीजेपी नेता ने कहा कि रॉकफेलर फाउंडेशन मध्य दिल्ली में एक प्रतिष्ठित सांस्कृतिक और बौद्धिक संगठन को मुख्य वित्तीय सहायता दे रहा था।

सूत्रों ने बताया कि DMK के पी. विल्सन ने फिर से यह आरोप लगाया कि ये संशोधन ईसाई समूहों को निशाना बनाते हैं, जो FCRA लाइसेंस वाले धार्मिक संगठनों में सबसे बड़ी संख्या में हैं।

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