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पीएम मोदी ने फ्रांस में क्यों नहीं की ट्रंप के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस? सामने आई असली वजह

Published: Mon, 24 Aug 2026 10:55 PM (IST)Updated: Tue, 25 Aug 2026 07:25 AM (IST)

फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और ट्रंप के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई, लेकिन भारत ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस से दूरी बनाए रखी।

ट्रंप के अप्रत्याशित व्यवहार के कारण भारत ने नहीं की थी संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस

ट्रंप के अप्रत्याशित व्यवहार के कारण भारत ने नहीं की थी संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जून में फ्रांस के एवियन-लेस-बेन्स में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई थी।

इस बैठक में भारत ने जानबूझकर संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस से दूरी बनाए रखी। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के अंदाजा न लगा पाने वाले व्यवहार (अनप्रिडिक्टेबल नेचर) को ध्यान में रखते हुए और सावधानी बरतने के उद्देश्य से लिया गया था।

ट्रंप का रवैया बना वजह

सरकारी सूत्रों ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि ट्रंप से मिलने वाले कई विदेशी प्रतिनिधिमंडल उनके अचानक और अनपेक्षित बयानों को लेकर हमेशा सतर्क रहते हैं। जैसा कि इससे पहले दक्षिण अफ्रीका और यूक्रेन के राष्ट्रपतियों के साथ उनकी मुलाकातों के दौरान भी देखा गया था।

इसी वजह से भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने रणनीति के तहत सवाल-जवाब वाले खुले प्रेस कॉन्फ्रेंस के बजाय केवल मीडिया की सीमित मौजूदगी का विकल्प चुना।

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने की पुष्टि

इस बात की पुष्टि भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी की। एक इवेंट में सर्जियो गोर ने बताया कि बैठक से ठीक पहले भारत ने अमेरिकी पक्ष को अपनी शर्त स्पष्ट कर दी थी।

उन्होंने ट्रंप के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए कहा, भारतीय विदेश मंत्रालय की मांग थी कि मीडिया को अंदर आने की इजाजत दी जाए, लेकिन कोई औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस या सवाल-जवाब का सत्र न रखा जाए।

ट्रंप ने इस पर सहमति जताते हुए कहा था, ठीक है, कोई बात नहीं।

ट्रंप ने पीएम मोदी की जमकर तारीफ की

तनावपूर्ण दौर के बाद भारत-अमेरिका संबंधों को पटरी पर लाने के लिए हुई इस बैठक में ट्रंप ने पीएम मोदी की जमकर तारीफ की थी। ट्रंप ने पीएम मोदी को बहुत मजबूत इरादों वाला और कठोर फैसले लेने वाला नेता बताया।

साथ ही उन्होंने यह आश्वासन भी दिया कि अगर भारत पर कोई सुरक्षा संकट या हमला होता है, तो अमेरिका मदद के लिए हमेशा उसके साथ खड़ा रहेगा।