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दोनों चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को क्यों लिखा पत्र? पूर्व CEC ने बताया कहां करनी चाहिए थी शिकायत

Published: Fri, 25 Sep 2026 08:16 PM (IST)

चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों के बीच मतभेदों की खबरों के बाद पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ...और पढ़ें

पूर्व CEC ओपी रावत (फोटो- ANI)

पूर्व CEC ओपी रावत (फोटो- ANI)

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। चुनाव आयोग के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों के बीच उपजे मतभेदों की खबर के बाद धीरे धीरे यह तो साफ हो रहा है कि एसआईआर के सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से ही लिए गए थे।

लेकिन यह बड़ा सवाल अबूझ बना हुआ है कि अगर दो चुनाव आयुक्त एस एस संधू और विवेक जोशी ने किसी मुद्दे पर कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा था तो उसका मकसद क्या था। क्योंकि कानून के अनुसार चुनाव आयुक्तों की रिपोर्टिंग सीधे राष्ट्रपति को है।

आयुक्तों की छुट्टी तक राष्ट्रपति कार्यालय से मंजूर होती है तो फिर उन्होंने ऐसा क्यों किया। अगर नहीं किया तो सामने आकर स्पष्ट क्यों नहीं कर रहे हैं। यह सवाल खुद पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने उठाया है।

जिस खबर में असहमति की बात कही गई थी उसी में जिक्र किया गया था कि संधू व जोशी की ओर से आयोग के आंतरिक काम-काज को लेकर कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा गया था। ओपी रावत ने दैनिक जागरण से चर्चा में बताया है कि चुनाव आयोग एक स्वायत्त संवैधानिक संस्था है, जो सिर्फ राष्ट्रपति के अधीन काम करती है।

राष्ट्रपति ही चुनाव आयुक्तों की छुट्टी और उसके विदेश भ्रमण को मंजूरी देते है। ऐसे में किसी आयुक्त की ओर से कैबिनेट सचिव को चिट्ठी लिखना न सिर्फ आश्चर्यजनक है बल्कि संदेह पैदा करता है। यह असंवैधानिक है। कैबिनेट सचिव या सरकार आयोग के कामकाज में दखल नहीं दे सकते है। निश्चित रूप से उनका यह कदम गलत था।

आयोग से जुड़े रहे एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह नहीं हो सकता है कि दोनों चुनाव आयुक्तों को इस मर्यादा का पता नहीं होगा। पता रहते हुए अगर ऐसा किया गया तो निश्चित ही इसके पीछे कुछ मंशा हो सकती है।

उक्त विशेषज्ञ ने कहा कि चिट्ठी लिखी गई या नहीं यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए और अगर लिखी गई तो क्यों लिखी गई इसे भी बताना चाहिए।

रावत ने कहा कि इस पूरे विवाद के बाद चुनाव आयोग की छवि बट्टा लगा है। यह सही नहीं है। ऐसे मे तीनों आयुक्तों को बैठना चाहिए। अगर कोई मतभेद है तो खत्म करना चाहिए और एक साथ बैठकर एक प्रेस कांफ्रेंस करनी चाहिए। जिसमें देश की जनता को बताया चाहिए, जो भी बातें सामने आयी है, वैसा नहीं है। सब ठीक चल रहा है। कोई गड़बड़ नहीं है।

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