जब 'सफेद सोना' बना संकट: 1865 में कैसे टूटा भारत का शेयर बाजार? अमेरिकी गृहयुद्ध से जुड़ा था कारण
भारत का पहला बड़ा शेयर बाजार क्रैश 1865 में अमेरिकी गृहयुद्ध के कारण हुआ था। युद्ध के दौरान भारत, विशेषकर ...और पढ़ें

1865 में पहली बार क्रैश हुआ था भारत का शेयर बाजार अमेरिकी गृहयुद्ध से जुड़ा था कारण (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत के शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव आम बात है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि देश का पहला बड़ा शेयर बाजार क्रैश साल 1865 में हुआ था। यह गिरावट किसी घरेलू वजह से नहीं, बल्कि अमेरिका में चल रहे गृहयुद्ध के असर से आई थी, जिसने भारत की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया था।
अमेरिका में गृहयुद्ध के दौरान यूरोप को वहां से कपास मिलना बंद हो गया था। ऐसे में भारत, खासकर मुंबई कपास का बड़ा सप्लायर बन गया। कपास की मांग तेजी से बढ़ी और इसे ‘सफेद सोना’ कहा जाने लगा। इस दौरान व्यापारियों और निवेशकों ने खूब पैसा कमाया।
इस तेजी के कारण बाजार में अचानक बहुत पैसा आ गया। लोगों ने बड़े पैमाने पर शेयरों में निवेश करना शुरू कर दिया। हर कोई मुनाफा कमाने की होड़ में लग गया और बाजार तेजी से ऊपर जाने लगा।
अचानक कैसे आई गिरावट?
जैसे ही अमेरिका का गृहयुद्ध खत्म हुआ, वहां से फिर कपास की सप्लाई शुरू हो गई। इससे भारत के कपास व्यापार को बड़ा झटका लगा। मांग घटने लगी और कंपनियों की कमाई तेजी से गिर गई। कपास के व्यापार पर निर्भर कंपनियां नुकसान में जाने लगीं। इसका सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ा और शेयरों की कीमतें तेजी से गिरने लगीं।
बाजार में आई इस गिरावट से निवेशकों को भारी नुकसान हुआ। बताया जाता है कि करीब 45 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति एक झटके में खत्म हो गई। कई बैंक और कंपनियां दिवालिया हो गए। निवेशक और ब्रोकर सड़कों पर आ गए। उनके पास काम करने के लिए कोई जगह नहीं बची थी और पूरा व्यापार तंत्र बिखर गया।
बरगद के पेड़ से शुरू हुई नई शुरुआत
इस संकट के बाद ब्रोकरों ने एक बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर अपना काम फिर से शुरू किया। यही जगह आगे चलकर ‘दलाल स्ट्रीट’ के नाम से मशहूर हुई। यहीं से बाद में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की नींव पड़ी, जो आज दुनिया के प्रमुख शेयर बाजारों में से एक है। 1865 का यह क्रैश आज भी एक उदाहरण है कि कैसे किसी दूसरे देश की घटना भारत की अर्थव्यवस्था को गहराई से प्रभावित कर सकती है।
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