नई दिल्‍ली, जेएनएन। BrahMos Missile: अपनी रक्षा जरूरतों के लिए भारत केवल हथियारों का आयात ही नहीं करता, बल्कि अब यह उन मुल्‍कों की सूची में शामिल है जो इसका निर्यात करते हैं। भारत के कुछ हथ‍ियारों की विदेशी सेना में भी मांग बढ़ी है। रक्षा सौदों को लेकर भारत की कुछ मुल्‍कों के साथ डील फाइनल हो चुकी है। कुछ देशों के साथ यह डील एडवांस स्‍टेज में चल रही है। कुछ ने भारत के साथ रक्षा उपकरण लेने की इच्‍छा जताई है। आइए इस कड़ी में जानते हैं कि भारत के कौन से रक्षा उपकरणों की घूम है। अंतरराष्‍ट्रीय रक्षा बाजार की प्रतियोगिता में इन हथ‍ियारों ने अपना लोहा मनवाया है।

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की धाक

1- भारत के ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की धाक दुनिया में है। भारत ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बेचने का फैसला लिया है। वियतनाम के अलावा इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका, चिली और ब्राजील समेत 15 देश अब तक ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल में अपनी दिलचस्‍पी दिखा चुके हैं। बीते पांच वर्षों से भारत के ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की धाक दुनिया में है। भारत ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बेचने का फैसला लिया है। वियतनाम बीते पांच वर्षों से ब्रह्मोस मिसाइल की मांग कर रहा है। इतना ही नहीं हनोई ने ब्रह्मोस खरीदने का आवेदन वर्ष 2011 से कर रखा है।

2- भारत ने पहली बार फ‍िलीपींस के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बेचने का करार किया है। फ‍िलीपींस ने अपनी नौसेना के लिए ब्रह्मोस का सौदा किया है। फ‍िलीपींस के रक्षा मंत्री डेलफ‍िन लोरेंजाना की ओर से 31 दिसंबर को एक नोटिस जारी किया गया था। यह रक्षा सौदा भारत में बने सुरक्षा उपकरणों का पहला सबसे बडा सौदा होगा। पहली बार ब्रह्मोस का परीक्षण वर्ष 2004 में किया गया था। ब्रह्मोस मिसाइल को वर्ष 2007 में शामिल किया गया था। इस मिसाइल के थल सेना, वायु सेना और नौसेना तीनों के लिए अलग-अलग वर्जन है।

3- ब्रह्मोस को रूस की मदद से भारत ने बनाया है। ब्रह्मोस रूसी क्रूज मिसाइल पर आधारित है। ब्रह्मोस की मारक क्षमता 500 किलोमीटर है, लेकिन निर्यात किए जाने वाले ब्रह्मोस का रेंज 290 किलोमीटर है क्योंकि मिसाइल टेक्नोलाजी कंट्रोल रिजीम के तहत 300 किलोमीटर के भीतर ही यह रेंज रखने की पाबंदी है। भारत दक्षिण-पूर्वी एशिया में मिसाइल की आपूर्ति कर रहा है। खास कर उन देशों को जिनका चीन से समुद्री या सीमा विवाद है। भारत इस इलाके में कई देशों की रक्षा मदद कर रहा है। खासकर वियतनाम, इंडोनेशिया और थाईलैंड भी ब्रह्मोस खरीदने में दिलचस्पी रखते हैं।

भारतीय तेजस बना कई देशों की पसंद

1- स्‍वदेशी तेजस विमान की वैश्विक स्‍तर पर चर्चा है। भारत का जेट विमान तेजस दक्षिण एशियाई देशों की पहली पंसद बना हुआ है। मलेशिया भारतीय तेजस की पहली पसंद बना हुआ है। मलेशिया के अलावा अमेरिका समेत आधा दर्जन मुल्‍कों ने भी इस विमान में अपनी दिलचस्‍पी दिखाई है। कई देशों से तेजस का रक्षा सौदा अंतिम चरण में है। अर्जेंटीना, आस्ट्रेलिया, मिस्र, अमेरिका, इंडोनेशिया और फिलीपींस इन छह देशों ने तेजस फाइटर जेट को खरीदने में अपनी दिलचस्पी दिखाई है।

पिनाका मिसाइल प्रणाली की मांग हुई तेज

1- भारत के पिनाका मिसाइल प्रणाली की मांग भी तेजी से उठ रही है। आर्मेनिया ने भारत की प‍िनाका मिसाइल प्रणाली लेने की इच्‍छा जताई है। भारत अपनी इस रक्षा प्रणाली को आर्मेनिया को निर्यात करने के लिए तैयार है। भारत ने स्‍वदेशी पिनाका मल्‍टी बैरल राकेट लान्‍चर सहित मिसाइल, राकेट और गोला बारूद निर्यात करने का फैसला किया है। एक रक्षा सौदे के तहत दोनों दोनों देशों के बीच इस महीने की शुरुआत में आर्मेनिया को हथियार और गोला-बारूद पहुंचाने के समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं।

2- राकेट लांचर पिनाका 70 किलोमीटर दूर तक दुश्मन के ठिकानों को नेस्तनाबूद कर सकता है। यह लांचर बेहद खराब मौसम में भी फायर करने में सक्षम है। यह लांचर 44 सेकेंड में 72 राकेट दाग सकता है। इसको आसानी से एक स्‍थान से दूसरे स्‍थान पर ले जाया जा सकता है। इसकी खास बात यह है कि हर मौसम और परिस्थिति में इसका इस्‍तेमाल किया जा सकता है। अडवांस्ड तकनीक से लैस यह लांचर अपने दुश्मनों को संभलने का तनिक भी मौका नहीं देता है। इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने तैयार किया है। एक दशक पहले ही भारतीय सेना में शामिल पिनाका मिसाइल का अब उन्नत संस्करण तैयार किया गया है।

रक्षा निर्यात में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि रक्षा निर्यात में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व में रक्षा निर्यात पर खास फोकस किया गया है। मेक इन इंडिया के तहत इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले पांच वर्षों में देश के रक्षा निर्यात में इजाफा हुआ है। गौरतलब है कि भारत ने 2025 तक रक्षा निर्यात के लिए 1.75 लाख करोड़ हथियारों का उत्पादन करने का लक्ष्‍य रखा है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित किया गया है और स्वदेशी निजी क्षेत्र की फर्मों द्वारा निर्मित किया गया है।

यह भी पढ़ें: Ukraine War: खतरनाक मोड़ पर पहुंचा रूस यूक्रेन युद्ध, पोलैंड बांट रहा आयोडीन की गोलियां, क्‍या बन रहे हालात..?

यह भी पढ़ें: अमेरिका के खिलाफ रूस के साथ आने वाले देशों का बढ़ता जा रहा है काफिला, अब बना ग्रुप-7

Edited By: Ramesh Mishra

जागरण फॉलो करें और रहे हर खबर से अपडेट