BRICS बैठक पर पड़ी पश्चिम एशिया तनाव की छाया, भारत को जारी करना पड़ा अलग आउटकम डॉक्यूमेंट
ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण संयुक्त बयान जारी नहीं हो सका। भारत ने अध्यक्ष ...और पढ़ें

ईरान-यूएई विवाद से BRICS बैठक में मतभेद (फाइल फोटो)
HighLights
पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण संयुक्त बयान नहीं जारी हुआ।
भारत ने अध्यक्ष के रूप में अलग आउटकम डॉक्यूमेंट जारी किया।
आतंकवाद की निंदा और स्वतंत्र फिलिस्तीन का समर्थन किया।
जयप्रकाश रंजन, जागरण नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर यूएई और ईरान के बीच पहले से जारी विवाद से जिस असर की संभावना ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक को लेकर थी, वहीं हुआ। शुक्रवार को इस दो दिवसीय बैठक का अंतिम दिन था और बैठक में संयुक्त बयान जारी करने को लेकर कोई सहमति नहीं बन पाई।
लिहाजा बतौर अध्यक्ष भारत की तरफ से एक स्टेटमेंट और आउटकम डाक्यूमेंट जारी किया गया। वैसे इसमें पश्चिम एशिया संघर्ष की बात है, एक स्वतंत्र फलिस्तीन देश की स्थापना की बात है, होर्मुज जल मार्ग को सभी देशों के लिए खोलने की बात है, लेकिन इन मुद्दों पर सदस्य देशों की तरफ से आये विरोध को भी दर्ज कराया गया है।
भारत के नेतृत्व में ब्रिक्स की यह दूसरी बैठक हुई, जिसमें यूएई व ईरान के धुर-विरोधी रवैये की वजह से संयुक्त बयान जारी नहीं हुआ है। ऐसे में सितंबर, 2026 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में संयुक्त बयान जारी होगा या नहीं, अब यह भारत के लिए चिंता की बात है।
जारी किया गया संयुक्त घोषणा पत्र
संयुक्त घोषणा पत्र तब जारी होता है, जब सारे सदस्य देश उसमें लिखित मुद्दों पर सहमत हों, लेकिन असहमति की स्थिति में अध्यक्ष की तरफ से एक बयान जारी होता है और उसमें विरोध करने वाले देशों की बात भी दर्ज की जाती है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर की अध्यक्षता में गुरुवार को बैठक के पहले ही दिन यूएई के उप विदेश मंत्री खलीफा शाहीन अर मरार और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच काफी तीखी बहस हो गई थी। विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) सुधाकर दलेला ने संयुक्त घोषणा पत्र जारी न होने को खास तवज्जो नहीं दी।
उन्होंने कहा कि आउटकम डाक्यूमेंट में 63 पैराग्राफ है जो बताता है कि हमने सभी सदस्यों को हर मुद्दे पर खुल कर चर्चा करने का अवसर दिया है। अधिकांश मुद्दों पर आम सहमति है। जैसे आतंकवाद, स्वास्थ्य, कृषि, नई प्रौद्योगिक जैसे क्षेत्रों पर। यह हमें बहुत ही अच्छा विषय देता है, जिसके आधार पर शिखर सम्मेलन की तैयारी की जाएगी।
भारत के लिए एक सकारात्मक संकेत यह रहा है कि ब्रिक्स मंत्रियों ने हर प्रकार के आतंकवाद की कड़ी निंदा की और 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की। इसमें 26 लोगों की मौत हो गई थी।
आतंकवाद के सभी रूपों व अभिव्यक्तियों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए सीमा पार से आतंकियों की आवाजाही, आतंकवाद की फंडिंग और आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध करने की निंदा की गई है। यह भी कहा गया है कि आतंकवाद को किसी भी धर्म, राष्ट्र, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील
इसी तरह से इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि गाजा पट्टी कब्जे वाले फलस्तीनी क्षेत्र का अविभाज्य हिस्सा है। विदेश मंत्रियों ने वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी को फलस्तीनी प्राधिकरण के अंतर्गत एक करने के महत्व को रेखांकित किया और फलस्तीनी लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार तथा स्वतंत्र राज्य फलस्तीन के गठन के अधिकार की मांग की गई है।
मंत्रियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह फलस्तीनी प्राधिकरण को आवश्यक सुधारों में पूरा समर्थन दे, जिससे फलस्तीनियों की स्वाधीनता और अलग राज्य की अपनी वैध आकांक्षाएं पूरी हो सकें।
