नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। मानसून ने इस बार धीमी शुरूआत की है। मानसून ने करीब एक सप्ताह की देरी से केरल में दस्तक दी थी। पिछले 12 वर्षों में मानसून की ये सबसे धीमी रफ्तार रही है। माना जा रहा था केरल पहुंचने में हुई देरी के बाद मानसून देश के अन्य राज्यों में भी धीमी रफ्तार से पहुंचेगा। धीमी रफ्तार की वजह से मानसून के अन्य राज्यों में करीब 10 दिन के देरी से पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा था। हालांकि, मानसून ने बड़ी राहत देते हुए अपनी रफ्तार बढ़ा दी है।

मौसम विभाग के अनुसार धीमी गति से बढ़ रहे मानसून की रफ्तार अचानक बढ़ गई है। आलम ये है कि मानसून ने पिछले चार दिनों (19 जून तक) में 10 राज्यों में उपस्थिति दर्ज करा दी है। इसके अलावा मानसून दो अन्य राज्यों में भी प्रवेश कर रहा है। उत्तर भारत की ओर बढ़ रहे मानसून ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में भी दस्तक दे दी है। रविवार को मानसून ने वाराणसी में भी दस्तक दे दी है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार निम्न दबाव क्षेत्र की वजह से मानसून ने अच्छी रफ्तार पकड़ ली है। यही वजह है कि मानसून ने करीब चार दिनों में 700 किलोमीटर की दूरी तय कर ली है। मालूम हो कि पिछले बुधवार को मानसून उत्तरी बंगाल की खाड़ी में था। बंगाल की खाड़ी से धकेले जाने के वजह से मानसून की चाल असामान्य हो गई है। यही वजह है कि वाराणसी में दस्तक दे चुके मानसून का अभी भी मुंबई में इंतजार है। अमूमन मानसून 10 जून तक मुंबई में दस्तक दे देता है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उम्मीद है कि मानसून एक-दो दिन में मुंबई पहुंच जाएगा। इसके साथ ही मानसून महाराष्ट्र के ज्यादातर क्षेत्र में 25 जून तक पूरी तरह फैल जाएगा। हालांकि इसके बाद मौसम की रफ्तार एक बार फिर धीमी पड़ सकती है। उम्मीद की जा रही है कि निम्न दबाव क्षेत्र के खत्म होने से पहले मानसून उत्तर की तरफ बढ़ते हुए, सोमवार को यूपी में और आगे बढ़ सकता है। मतलब सोमवार को यूपी के कई और क्षेत्रों में मानसून दस्तक दे सकता है।

पिछले चार दिन में मानसून ने की रफ्तार तेज हुई है, लेकिन इसकी वजह से इस माह होने वाली न्यूनतम बारिश में किसी तरह का परिवर्तन होने का अनुमान नहीं है। एक से 23 जून के बीच हुई मानसून की बारिश सामान्य से 38 फीसद कम है, जबकि 19 जून तक इसमें 44 फीसद की कमी दर्ज की गई थी। अभी भी मानसून देर से शुरू होने और शुरूआती धीमी रफ्तार के कारण सामान्य से बहुत पीछे है।

हालांकि मानसून की मौजूदा तेज प्रगति सूखे की स्थिति से जूझ रहे मध्य भारत और दक्षिणी भारत के लिए अच्छी खबर है। बिहार में हो रही बारिश की वजह से राज्य के लोगों को भी काफी राहत मिली है। बारिश की वजह से बिहार में चमकी बुखार (Acute Encephalitis) से जूझ रहे लोगों की संख्या में भी कमी आयी है। इस गर्मी में भीषण जल संकट का सामना करने वाले मराठवाड़ा और विदर्भ में भी रविवार को अच्छी बारिश दर्ज की गई है।

मध्य प्रदेश, रायलसीमा, आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों, छत्तीसगढ़, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसून सक्रिय है। कर्नाटक, तेलंगाना, पश्चिमी मध्य प्रदेश और जम्मू एवं कश्मीर के कुछ इलाकों में भी रविवार को बारिश ने लोगों को राहत प्रदान की है। महाराष्ट्र की तरफ बढ रहा मानसून अगले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश और दक्षिणी गुजरात में भी दस्तक देने वाला है। मानसून की आगे की चाल, विशेष रूप से उत्तर-पश्चिमी भारत के अधिकांश हिस्सों में, बंगाल की खाड़ी से उठने वाले एक और निम्न दबाव क्षेत्र सिस्टम पर निर्भर करेगी।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अभी बंगाल की खाड़ी के ऊपर कोई निम्न दबाव क्षेत्र नहीं दिख रहा है। अगले कुछ दिनों में उत्तर भारत के ज्यादातर एरिया में लोगों को तेज हवाओं और गरज-चमक का सामना करना पड़ सकता है। लिहाजा, अभी ये कहना मुश्किल है कि मानसून दिल्ली और आसपास के एरिया में कब तक दस्तक देगा।

मानसून की देरी की वजह से की जगहों पर अब भी लोगों को बारिश का इंतजार है। एक से 19 जून के बीच हुई बारिश के आंकड़ों को देखें तो पता चलता है कि इस दौरान मध्य भारत में 43.5 फीसद और पूर्वी तथा उत्तर-पूर्वी भारत में सामान्य से 44 फीसद कम बारिश हुई है। इस दौरान दक्षिण भारत में भी सामान्य से 30 फीसद कम बारिश हुई है, जबकि उत्तर भारत में भी अब तक सामान्य से 20 फीसद कम बारिश दर्ज की गई है। उत्तर भारत में सामान्य से कम बारिश का आंकड़ा इसलिए कुछ कम प्रतीत हो रहा है, क्योंकि यहां सबसे देरी से मानसून पहुंचता है। ऐसे में जून के समय यहां बारिश कम ही होती है।

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Posted By: Amit Singh

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