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'हम पहले प्रयास में ही मंगल ग्रह तक पहुंचे', इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव में बोले पीएम मोदी

Published: Tue, 27 Oct 2026 06:54 PM (IST)

पीएम मोदी ने इमर्जिंग साइंस-टेक्नोलॉजी और इनोवेशन कॉन्क्लेव में भारत की वैज्ञानिक प्रगति पर जोर दिया।

भारत ने पहले प्रयास में मंगल और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचा : PM मोदी

भारत ने पहले प्रयास में मंगल और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचा : PM मोदी

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पीएम मोदी मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित इमर्जिंग साइंस-टेक्नोलॉजी और इनोवेशन कॉन्क्लेव में में दर्शकों को संबोधित कर रहे हैं।

अपने भाषण में साइंस और तकनीक पर बोलते हुए पीएम ने कहा,'आज भारत के युवा जिस स्किल पर सोच रहे हैं, जिस आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहे हैं, वह उत्साह बढ़ाने वाला है।

पहले प्रयास में हम मंगल गृह पर पहुंचे: प्रधानमंत्री

पीएम ने आगे कहा,'आज हम पहले प्रयास में ही मंगल ग्रह तक पहुंचते हैं। हम चंद्रमा के उस दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचते हैं, जहां कोई नहीं पहुंच पाया।'

दुनिया में कुछ इनोवेटिव होता था तो कुछ सालों बाद वो तकनीक हम तक पहुंचती थी। हम उसे अपनाते थे या उसमें कुछ सुधार करके आगे बढ़ाते थे। लेकिन आज 21वीं सदी का भारत एक नई सोच और नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।

अब हमारा लक्ष्य भारत के लिए, दुनिया के लिए, आज के लिए, आने वाले कल के लिए नई टेक्नोलॉजी बनाना, उसकी दिशा तय करना और दुनिया की समस्याओं के समाधान देने की शक्ति विकसित करना है।

कोरोना काल में हमें दूसरे देशों को भी वैक्सीन भेजी: पीएम मोदी

पीएम ने आगे कहा, 'कोरोना काल में हमने इसका उदाहरण देखा है। जब दुनिया के अनेक देश वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर चुनौतियों का सामना कर रहे थे, भारत ने अपनी वैक्सीन विकसित की। भारत ने बड़े स्तर पर वैक्सीनेशन किया और दूसरे देशों को भी वैक्सीन भेजी। यही 21वीं सदी के भारत का आत्मविश्वास है।

ज्ञान और खोज पर आधारित रही है भारत की संस्कृति: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा, 'शून्य की खोज से लेकर संख्या प्रणाली के विकास और खगोल विज्ञान में प्रगति तक, भारत की संस्कृति हमेशा ज्ञान और खोज पर आधारित रही है।

आज, हम आधुनिक तकनीक और नए आत्मविश्वास के साथ इस वैज्ञानिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। पिछले एक साल के कुछ उदाहरण हमें इन बदलावों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करते हैं।

30 अक्टूबर को, जब पूरा देश डॉ. होमी जहांगीर भाभा की जयंती मनाने की तैयारी कर रहा है, तो परमाणु ऊर्जा से चर्चा की शुरुआत करना बिल्कुल उचित होगा।

जैसा कि आप सभी जानते हैं, एक 'विकसित भारत' के निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर परमाणु ऊर्जा की आवश्यकता है। परमाणु ईंधन के आयात पर हमारी निर्भरता हमारी ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक चुनौती है।

इसलिए, भारत अपनी खुद की 'फास्ट ब्रीडर रिएक्टर' तकनीक विकसित कर रहा है। कुछ महीने पहले, देश के 500 मेगावाट के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने 'पहली क्रिटिकलिटी' हासिल की, जो हमारी दीर्घकालिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।'

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