नीतियों से नतीजों तक का सफर: महिला-बाल विकास की योजनाओं की 'जमीनी हकीकत' पर दिल्ली में महामंथन
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय 8-9 अक्टूबर को दिल्ली में एक शिखर सम्मेलन आयोजित कर रहा है।


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
माला दीक्षित, नई दिल्ली। किसी बच्चे को आंगनवाड़ी केंद्र पर मिलने वाला खाना कितना पौष्टिक है, गर्भवती महिला तक पोषण संबंधी सुविधा समय पर पहुंच रही है या नहीं, छोटे बच्चों को स्कूल जाने से पहले कैसी शुरुआती शिक्षा मिल रही है और मुश्किल में फंसे बच्चे को सुरक्षा तंत्र से कितनी जल्दी मदद मिलती है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय अब इन सवालों पर ज्यादा जोर देने की तैयारी में है। इन मुद्दों को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच आठ और नौ अक्टूबर को नई दिल्ली में व्यापक चर्चा होगी। जिसमें बच्चों के पोषण से लेकर महिलाओं की सुरक्षा तक योजनाओँ की जमीनी पड़ताल की जाएगी।
बच्चों के पोषण, सुरक्षा और महिलाओं के सशक्तिकरण पर चर्चा
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय महिला एवं बाल विकास पर दो दिवसीय शिखर सम्मेलन कर रहा है। इस सम्मेलन में केंद्रीय महिला बाल विकास मंत्री और सचिव के अलावा सभी राज्यों के महिला बाल विकास मंत्री, सचिव और अधिकारी हिस्सा लेंगे।
आखिरी दिन यानी नौ अक्टूबर को सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी भाग लेंगे। प्रधानमंत्री के समक्ष दो दिन हुए मंथन के निष्कर्ष और प्रेजेन्टेशन पेश किये जाएंगे। कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली में सुषमा स्वराज भवन में होगा।
यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वार परिकल्पित विभागीय शिखर सम्मेलनों की श्रंखला का दूसरा सम्मेलन है जिसका उद्देश्य सहकारी संघवाद को मजबूत करना, राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देना तथा केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए परिणामों में तेजी लाना है।
दो दिवसीय सम्मेलन में चार प्रमुख विषयों पर चर्चा होगी। बेहतर पोषण और प्रारंभिक शिक्षा के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों की नई परिकल्पना। असुरक्षित एवं कमजोर बच्चों के संरक्षण तंत्र को मजबूत करना।
संस्थागत और विधायी व्यवस्थाओँ के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से महिलाओँ की सुरक्षा सुनिश्चित करना और महिलाओँ के सशक्तीकरण से जुड़ी प्रमुख योजनाओं की प्रभावशीलता और परिणामों में सुधार करना।
इसमें होने वाली चर्चा का फोकस केवल योजनाओं की समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह देखने पर रहेगा कि जमीन पर इन योजनाओं का वास्तविक असर कितना हो रहा है।
योजनाओं की जमीनी हकीकत और प्रभाव का आकलन
सम्मेलन के पहले दिन टेक होम राशन और गर्म पके भोजन की गुणवत्ता के साथ साथ पोषण ट्रैकर में दर्ज आंकड़ों में सुधार, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा, सोशल मीडिया के प्रभाव सहित कमजोर एवं असुरक्षित बच्चों के संरक्षण तंत्र तथा महिला सुरक्षा के लिए मौजूदा व्यवस्थाओँ के क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान पर चर्चा होगी।
दूसरा दिन महिलाओं के सशक्तीकरण से जुड़ी योजनाओं की प्रभावशीलता और उनके परिणामों को बेहतर बनाने पर केंद्रित रहेगा। भाग लेने वाले राज्य अपने अनुभव, चुनौतियां और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियां साझा करेंगे तथा सहमति से ऐसे परिणाम तय करने का प्रयास करेंगे, जिन पर सभी मिलकर काम कर सकें।
इससे सहकारी संघवाद और साझा जिम्मेदारी की भावना को और मजबूत किया जाएगा। सम्मेलन के दौरान तय किये गए प्रमुख परिणामों और उन्हें हासिल करने के लिए तैयार की गई कार्ययोजनाओं को समापन सत्र के दौरान प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
