नई दिल्‍ली, एजेंसी। वीवीआइपी हेलीकॉप्टर घोटाले में कथित बिचौलिये क्रिश्चियन माइकल की कोई भी दलील दुबई के कोर्ट में नहीं टिक पाई। आरोपी माइकल ने भारत में राजनीतिक रूप से प्रताड़ित किए जाने और नस्ली और धार्मिक भेदभाव की आशंका जताई थी, लेकिन कोर्ट ने कहा कि भारत सरकार आपराधिक मामले में उसकी तलाश कर रही है, इसलिए उसे भारत में जाकर मामलों का सामना करना होगा।

दुबई की अदालत के इस फैसले से मिशेल के भारत प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, भारतीय जांच एजेंसियों को अभी तक दुबई के अधिकारियों से आदेश की फॉर्मल कॉपी नहीं मिली है। लेकिन आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को देर रात बताया कि कुछ समय पहले भारत ने इस खाड़ी देश से औपचारिक रूप से क्रिश्चियन मिशेल जेम्स (54) का प्रत्यर्पण कराने की औपचारिक अपील की थी। भारत सरकार की यह अपील सीबीआइ और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से की गई आपराधिक जांच पर आधारित थी।

मिशेल ने वकील ने दलील दी थी कि भारत में उसके साथ मानवीय व्यवहार होने की उम्‍मीद कम है। साथ ही उस पर राजनीतिक हस्तियों से संबंध होना का दबाव भी डाला जा सकता है। लेकिन दुबई कोर्ट ने मिशेल की दलील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा, 'इस मामले में क्‍योंकि प्रत्यर्पण के अनुरोध की प्रकृति में राजनीतिक, धार्मिक या नस्लीय नहीं है, इसलिए दलील को स्‍वीकार नहीं किया जा सकता।'

मिशेल के प्रत्यर्पण के आदेश को सीबीआइ और ईडी के पक्ष में बड़ी सफलता माना जा रहा है। ईडी ने मिशेल के खिलाफ जून, 2016 में जारी अपने आरोप पत्र में कहा है कि उसने अगस्ता वेस्टलैंड मामले में 225 करोड़ रुपये की दलाली ली थी। बता दें कि फरवरी 2017 में मिशेल को यूएई में गिरफ्तार कर लिया गया था। मिशेल के वकील ने आरोप लगाया था कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) उनके मुवक्किल पर दबाव बना रही है। हालांकि जांच एजेंसी ने इन आरोपों से साफ इन्कार किया था।

Posted By: Tilak Raj