'सेंगोल' बनाने वाले जौहरी वुम्मिडी एथिराज का निधन, 99 साल की उम्र में ली आखिरी सांस; PM मोदी ने जताया शोक
ऐतिहासिक 'सेंगोल' के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रमुख जौहरी वुम्मिडी एथिराज का 99 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

सेंगोल बनाने वाले प्रमुख जौहरी वुम्मिडी एथिराज का निधन

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डिजिटल डेस्क, चेन्नई। ऐतिहासिक ‘सेंगोल’ बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले प्रमुख जौहरी वुम्मिडी एथिराज का बुधवार को यहां निधन हो गया। वह 99 वर्ष के थे। उनके परिवार में तीन संतानें—विजया भारती, उदय कुमार वुम्मिडी और विजयेंद्रन वुम्मिडी हैं। उनकी पत्नी सुमित्रा वुम्मिडी का उनसे पहले निधन हो गया था।
जाने-माने जौहरी के प्रचारक ने इंटरनेट मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, 'हमें गहरे दुख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि हमारे प्रिय श्री वुम्मिडी एथिराज गरु का 21 अक्टूबर को निधन हो गया।' उन्होंने कहा, 'आइए, हम उनके जीवन का सम्मान करें, उनकी यादों को संजोएं और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करें।'
सेंगोल बनाने वाले प्रमुख जौहरी वुम्मिडी एथिराज का निधन
25 नवंबर, 1926 को जन्मे एथिराज, 125 साल पुराने वुम्मिडी बंगारू ज्वेलर्स के मालिक वुम्मिडी परिवार के मुखिया थे। 20 वर्ष की आयु में एथिराज सोने की परत चढ़े चांदी के राजदंड ‘सेंगोल’ के निर्माण में शामिल रहे। यह 1947 में ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र भारत को सत्ता हस्तांतरित किए जाने का प्रतीक था।
14 अगस्त, 1947 की रात नेहरू को तमिलनाडु के तिरुवदुथुरै अधीनम मठ के पुजारियों ने सेंगोल सौंपा था। वे इस अवसर के लिए विशेष रूप से आए थे। स्वतंत्रता के समय वुम्मिडी ज्वेलर्स ने सेंगोल बनाया था। 28 मई, 2023 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे नए संसद भवन में विधिवत स्थापित किया था।
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जताया शोक
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा, 'श्री वुम्मिडी एथिराज जी के निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है। वह एक प्रतिष्ठित शिल्पकार थे, जिनका काम भारत के इतिहास के एक निर्णायक क्षण का हिस्सा बना।
उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं।' उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि ऐतिहासिक सेंगोल बनाने में एथिराज के प्रयासों को हमेशा सम्मान से याद किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पोस्ट में कहा, 'थिरु वुम्मिडी एथिराज के निधन से बेहद दुखी हूं। तमिलनाडु के प्रतिष्ठित परिवार के एथिराज को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को भेंट किए गए ऐतिहासिक सेंगोल को बनाने में उनके योगदान के लिए हमेशा याद किया जाएगा।'
