नई दिल्ली, एएनआइ। चीन द्वारा गुलाम कश्मीर में सड़क बनाए जाने पर हिंसा भड़क उठी है। इस दौरान ना केवल लोगों ने पुलिस पर पथराव किया बल्कि एक चेक पोस्ट को भी आग के हवाले कर दिया। दरअसल, तोपखाने और सैन्य कर्मियों को क्षेत्र में स्थानांतरित करने के लिए बीजिंग यारकंद से गुलाम कश्मीर तक 33 किलोमीटर की सड़क बना रहा है। इसको लेकर यहां के लोग विरोध कर रहे हैं।

मीडिया को दिए साक्षात्कार में नागरिक अधिकार कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखें तो गुलाम कश्मीर पाकिस्तान के हाथ से निकल चुका है। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) द्वारा बनाई जा रही सड़क को लेकर यहां के लोग काफी नाराज हैं। 13 जनवरी से यहां हड़ताल चल रही है और शुक्रवार को हुआ विरोध-प्रदर्शन उसी हड़ताल का हिस्सा था। एक महीने में यह दूसरी बार है जब हड़ताल के विरोध- प्रदर्शन हिंसक हो उठा है। अबकी बार यह ज्यादा व्यापक है और पुलिस के नियंत्रण से बाहर है।

गुलाम कश्मीर में अराजकता का माहौल

मिर्जा ने कहा कि इमरान सरकार के आने के बाद गुलाम कश्मीर में अराजकता का माहौल है। क्षेत्र के लोग भोजन की कमी से परेशान हैं। ना तो यहां बिजली है और ना ही पीने का साफ पानी। शहर गंदगी से पटे पड़े हैं। पूरा सिस्टम ध्वस्त हो गया है। पाकिस्तान सरकार ने इसे देश का पांचवां प्रांत घोषित कर दिया है। सरकार के इस कदम का यहां के लोग विरोध कर रहे हैं और प्रतिदिन इसके खिलाफ विरोध-प्रदर्शन होते हैं।

मिर्जा के मुताबिक प्रतिदिन गिलगिट-बाल्टिस्तान, गुलाम कश्मीर में विरोध-प्रदर्शन होते हैं, लेकिन पाकिस्तानी मीडिया इस संबंध में कोई खबर नहीं दे रहा है। वहीं अंतरराष्ट्रीय मीडिया को क्षेत्र में आने की अनुमति नहीं है। मिर्जा ने इस तथ्य पर अफसोस जताया कि गुलाम कश्मीर की निर्वाचित सरकार इस्लामाबाद में बैठी है जबकि क्षेत्र की जनता चीनी घुसपैठ के खिलाफ धर्मयुद्ध लड़ रही है।

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