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विकसित भारत के लिए बैंकिंग क्षेत्र में बड़े सुधारों का खाका तैयार, उच्चस्तरीय समिति गठित

Published: Sat, 31 Oct 2026 10:59 PM (IST)

केंद्र सरकार ने विकसित भारत के लक्ष्य को साधने के लिए बैंकिंग क्षेत्र में बड़े सुधारों का नया एजेंडा तैयार करने हेतु एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है।

(AI से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर)

(AI से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. उच्चस्तरीय समिति का गठन, सुरेश एन. पटेल अध्यक्ष।

  2. विकसित भारत 2047 के लिए बैंकिंग सुधारों का रोडमैप।

  3. वैश्विक मानकों को अपनाना, निजीकरण की संभावना पर विचार।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। बैंकिंग सेक्टर की मौजूदा स्थिति को लेकर हो रही राजनीतिक बहस को दरकिनार करते हुए केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र में बड़े सुधारों का एक नया एजेंडा तैयार करने का फैसला किया है।

शुक्रवार को वित्त मंत्रालय ने ‘विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर उच्चस्तरीय समिति’ का गठन किया, जबकि उसी दिन आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय बोर्ड की बैठक में भी बैंकिंग सुधार प्रमुख मुद्दा रहा।

दोनों कदम एक साथ आने से साफ है कि सरकार और आरबीआई मिलकर बैंकिंग को 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इस समिति की घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में की थी। पूर्व केंद्रीय सतर्कता आयुक्त सुरेश एन. पटेल इसके चेयरमैन हैं।

सदस्य के रूप में आरबीआई के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू, इंडियन बैंक की पूर्व एमडी एंड सीईओ पद्मजा चुंदुरु और आरबीआई के पूर्व डिप्टी गवर्नर एन. एस. विश्वनाथन शामिल हैं। वित्तीय सेवा विभाग के संयुक्त सचिव (बैंकिंग) सदस्य-सचिव होंगे। समिति का कार्यकाल छह महीने है।

इसके प्रमुख कार्यों में वर्तमान बैंकिंग प्रथाओं और प्रूडेंशियल नॉर्म्स का आकलन कर वैश्विक सर्वोत्तम तरीकों को भारतीय व्यवस्था में अपनाना, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बैंक बनाने का रोडमैप तैयार करना, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और सहकारी बैंकों सहित नियामकीय तथा कानूनी ढांचे की समीक्षा करना है। 

इसके साथ ही बैंकों, डीएफआई और एनबीएफसी की लंबी अवधि की पूंजी जरूरत का आकलन, कारोबार के लिए पूंजी की लागत में अंतर की जांच, एआई व डिजिटल इनोवेशन का रोडमैप तैयार करना, साइबर जोखिमों से सुरक्षा और भविष्य के लिए तैयार वर्कफोर्स की रणनीति बनाना तथा प्राथमिकता क्षेत्र ऋण और लीड बैंक योजना की समीक्षा शामिल है।समिति सरकार द्वारा सौंपे गए किसी अन्य विषय पर भी सुझाव दे सकती है।

यह समिति बैंकिंग में निजीकरण की नई राह खोलने का भी आधार बन सकती है। मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में पहली बार आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक विनिवेश के जरिए बैंकिंग निजीकरण की दिशा में ठोस कदम उठाया है।

हाल ही में कैबिनेट ने कनाडा की फेयरफैक्स को 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की मंजूरी दी है। कुछ वर्ष पहले वित्त मंत्री सीतारमण ने आम बजट में दो सरकारी बैंकों के निजीकरण की घोषणा की थी, लेकिन उस पर अभी तक अमल नहीं हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार बैंकों के पुनर्गठन और उन्हें वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने की बात कर चुके हैं।

15 अगस्त 2024 को लाल किले से उन्होंने कहा था कि सुधारों के बाद भारतीय बैंक दुनिया के सबसे मजबूत बैंकों में शुमार हो गए हैं। अगस्त 2026 के स्वतंत्रता दिवस भाषण में उन्होंने लक्ष्य रखा कि कम से कम एक भारतीय बैंक दुनिया के टॉप-5 बैंकों में शामिल हो।

अप्रैल 2024 में आरबीआई के 90 वर्ष पूरे होने के मौके पर उन्होंने बैंकिंग के बदलाव को वैश्विक केस स्टडी बताया और कहा कि आरबीआई विकसित भारत के बैंकिंग विजन के लिए उपयुक्त संस्था है। समिति के सुझाव इन्हीं लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मददगार साबित हो सकते हैं।

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