स्कूल छूटने से UPSC में सिलेक्शन तक... जीत के जज्बे से भरी है IPS माविस टास की सफलता की कहानी
आईपीएस माविस टास (IPS Mais Tas) ने आर्थिक तंगी और दो असफलताओं के बावजूद UPSC परीक्षा पास कर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में जगह बनाई।

जीत के जज्बे से भरी है IPS माविस टास की सफलता की कहानी।
HighLights
आर्थिक तंगी के कारण माविस को स्कूल छोड़ना पड़ा था।
दो बार असफल होने के बाद उन्होंने UPSC परीक्षा पास की।
सोनभद्र की पहली महिला ASP बनीं माविक टास।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ा होती है। ऐसी ही हौसलों की उड़ान की कहानी है, उत्तर प्रदेश के सोनभद्र की एएसपी माविस टास (IPS Mais Tas)की, जिन्होंने तकलीफों और मुसीबतों के बावजूद, अपने सपने के लिए लड़ना नहीं छोड़ा, भारतीय पुलिस सेवा में शामिल हुईं।
माविस टास जब स्कूल में पढ़ती थीं, तब आर्थिक तंगी के कारण उन्हें और उनकी बड़ी बढ़ी बहन को एक साल तक स्कूल से दूर रहना पड़ा, क्योंकि उनके पिता उनकी ट्यूशन फीस नहीं भर पा रहे थे। कई सालों बाद संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में दो बार असफल होने के बाद, उन्होंने तीसरे प्रयास में इसे पास किया और IPS में शामिल हुईं।
आज, टाक उत्तर प्रदेश कैडर की 2022 बैच की IPS अधिकारी हैं और सोनभद्र जिले में अतिरिक्त अधीक्षक (ASP) के रूप में कार्यरत हैं। वह वहां ASP का पद संभालने वाली पहली महिला IPS अधिकारी हैं। यूपी पुलिस की अधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, उनकी नियुक्ति 19 सितंबर, 2026 को प्रभावी हुई।
स्कूल की फीस भरने के लिए संघर्ष करने वाले परिवार से निकलकर पुलिस सेवा तक पहुंचने का उनका सफर, उनके पिता अब्दुल करीम टाक के उस दृढ़ संकल्प को भी दर्शाता है, जिसके तहत उन्होंने रिश्तेदारों और समाज के लोगों की आलोचनाओं के बावजूद अपनी तीनों बेटियों को शिक्षित करने का फैसला किया।
राजस्थान के फालना में हुआ माविस का जन्म
UP पुलिस की वेबसाइट का अनुसार, माविस का जन्म 24 सितंबर, 1996 को राजस्थान के पाली जिले के फालना में हुआ था। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, बेहतर आर्थिक अवसरों की तलाश में उनके पिता 2003 में पूरे परिवार के साथ मुंबई चले गए। परिवार का खर्च चलाने के लिए उन्होंने टाइपिंग और अनुवाद जैसे कई तरह के काम किए।
आर्थिक दबाव का असर बच्चों की शिक्षा पर भी पड़ा। जब उनके पिता ट्यूशन की फीस नहीं भर पाए तो माविस और उनकी बहन को एक साल के लिए स्कूल छोड़ना पड़ा। लड़कियों की शिक्षा पर पैसे खर्च करने को लेकर परिवार को समाज की आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा। लेकिन उनके पिता ने ऐसी बातों का उनके भविष्य पर असर नहीं पड़ने दिया और अपनी तीनों बेटियों को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया।
स्कूल की पढ़ाई छूटने से पोस्ट ग्रेजुएशन तक
राजस्थान में अपनी शुरुआती स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद वह अपने परिवार के साथ मुंबई आ गईं। उन्होंने बाद में मुंबई के न्यू कैम्ब्रिज स्कूल और रॉयल कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स में पढ़ाई की।
उन्होंने पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया और फिर 'इंडियन फेडरेशन एंड लैंग्वेज पॉलिटिक्स' विषय में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। उनकी इस शिक्षा ने उन्हें सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू करने के लिए एक मजबूत शैक्षणिक आधार दिया।
UPSC में तीसरे प्रयास में मिली सफलता
माविस ने पहली बार 2019 में UPSC सिविल सेवा परीक्षा दी। अपने पहले दो प्रयासों में वह प्रारंभिक परीक्षा पास नहीं कर सकीं। हार मानकर अपने इरादे छोड़ने के बजाय उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और उन कमजोरियों पर काम किया जहां उन्हें दिक्कतें आ रही थीं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने किसी कोचिंग संस्थान में जाने के बजाय खुद से पढ़ाई करने का फैसला किया।

उनके तीसरे प्रयास में उन्हें वह सफलता मिली जिसके लिए वह कड़ी मेहनत कर रही थीं। उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2021 में 'ऑल इंडिया रैंक 386' हासिल की और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए चुनी गईं।
सोनभद्र में पोस्टिंग
माविस 2022 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की अधिकारी हैं। सोनभद्र में तबादले से पहले, उन्होंने बांदा जिले में काम किया, जहां उनके पास सर्कल ऑफिसर साइबर और क्राइम जैसी जिम्मेदारियां थीं। उत्तर प्रदेश सरकार ने सितंबर 2026 में उनका तबादला सोनभद्र कर दिया।
उनकी नियुक्ति के साथ ही ऐसा पहली बार हुआ जब सोनभद्र में किसी महिला IPS अधिकारी ने ASP का पद संभाला। टाक की कहानी ने लोगों का ध्यान इसलिए भी खींचा है क्योंकि उन्होंने बिना किसी कोचिंग के UPSC परीक्षा पास की और साथ ही उन कठिन परिस्थितियों के कारण भी, जिनमें उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
