UPI के नए नियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, याचिकाकर्ता ने कहा- MDR से आम आदमी पर पड़ेगा असर
केंद्र सरकार के नए UPI फ्रेमवर्क को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने 2000 रुपये से अधिक ...और पढ़ें
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केंद्र सरकार के नए UPI फ्रेमवर्क को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई
HighLights
केंद्र सरकार के नए UPI फ्रेमवर्क को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई
2000 रुपये से अधिक के UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होगा
याचिकाकर्ता ने MDR से आम नागरिकों पर पड़ने वाले असर की आशंका जताई
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार के नए UPI फ्रेमवर्क लागू किए जाने को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस कदम का असर आखिरकार आम नागरिकों पर पड़ सकता है। वकील अंजन दत्ता ने वित्त मंत्रालय की ओर से 14 और 15 सितंबर को जारी दो नोटिफिकेशन को रद करने की मांग की है।
इन नोटिफिकेशन में 2000 रुपये से ज्यादा के UPI मर्चेंट ट्रांजैनक्शन के लिए नया सिस्टम लागू किया गया था। याचिका में केंद्र सरकार, RBI, NPCI और UPI को प्रतिवादी बनाया गया है।
सरकार ने दिया था जवाब
इससे पहले, वित्त मंत्रालय ने UPI के नए नियमों के पीछे विदेशी दबाव के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ये बदलाव पूरी तरह से घरेलू जरूरतों के आधार पर किए गए हैं। मंत्रालय ने साफ किया कि 15 अक्टूबर से 2000 रुपये से ज्यादा के कुछ खास मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0।4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होगा।
इसका मतलब है कि 75000 रुपये और उससे ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए यह चार्ज ज्यादा से ज्यादा 300 रुपये होगा। सरकार ने कहा कि पर्सन-टू-पर्सन UPI ट्रांजैक्शन अभी भी मुफ्त ही रहेंगे, जबकि नए नियमों के तहत लगभग 96% पर्सन-टू-मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
