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UPI चार्ज पर विदेशी दबाव के आरोप खारिज, केंद्र ने MDR को लेकर स्थिति की स्पष्ट

Published: Wed, 16 Sep 2026 04:24 PM (IST)

केंद्र सरकार ने UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने को लेकर विपक्ष के विदेशी दबाव वाले आरोपों का खंडन किया है।

केंद्र ने UPI MDR पर विदेशी दबाव के आरोपों का खंडन किया

केंद्र ने UPI MDR पर विदेशी दबाव के आरोपों का खंडन किया

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने को लेकर विपक्ष के विदेशी दबाव वाले आरोपों का केंद्र सरकार ने जवाब दिया है। बुधवार को वित्त मंत्रालय की तरफ से साफ किया गया है कि यह फैसला विदेशी दबाव में नहीं लिया गया।

UPI से जुए फैसले भारत सरकार अपने लेवल पर करती है और इनका विदेशी दबाव से किसी तरह का कोई लेना देना नहीं है। नए चार्जेस लगाने का सरकार का उद्देश्य सिर्फ डिजिटल पेमेंट को आत्मनिर्भर और आसान बनाना है। मंत्रालय की तरफ से इसपर स्पस्टीकरण देते हुए एक सोशल मीडिया पोस्ट भी सामने आया।

इसमें बताया गया है कि आम उपभोक्ताओं के लिए UPI भुगतान पहले की तरह मुफ्त ही रहेगा। दोस्तों को पैसे भेजना, दुकानों पर पेमेंट करने या QR कोड स्कैन करना इन सभी पर कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा।

कहां लगेगा चार्ज और कहां नहीं?

P2P पर कोई चार्ज नहीं: एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति (Person-to-Person) को पैसे भेजने पर हमेशा कोई चार्ज नहीं लगता, चाहे रकम कितनी भी हो।

छोटे व्यापारियों को सुरक्षा: UPI QR कोड के ज़रिए हर महीने ₹1 लाख तक कमाने वाले व्यापारियों के लिए कोई चार्ज नहीं है।

रोजमर्रा के पेमेंट सुरक्षित: 95% से ज्यादा मर्चेंट पेमेंट ₹2,000 से कम के होते हैं, ये फ्री बने रहेंगे।

₹2,000 से ज्यादा पर मामूली MDR: ₹2,000 से ज्यादा के बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर व्यापारियों को एक छोटा शुल्क (0।4%) देना होगा, जो क्रेडिट कार्ड या दूसरे नेटवर्क चार्ज की तुलना में बहुत कम है।

जरूरी सेवाओं पर तय शुल्क: रेलवे, ईंधन, टेलीकॉम, बिल पेमेंट, इंश्योरेंस आदि के लिए ₹2,000 से ज़्यादा के ट्रांज़ैक्शन पर ₹5 का फ्लैट शुल्क लगेगा।

खास कम दरें: म्यूचुअल फंड और सिक्योरिटीज पेमेंट पर सिर्फ़ 0।02% शुल्क लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 होगी।

ग्राहकों के लिए सुरक्षा उपाय

बैंकों को निर्देश: व्यापारी MDR का खर्च ग्राहकों पर नहीं डाल सकते।

कोई छिपा हुआ शुल्क नहीं: UPI ऐप्स प्लेटफ़ॉर्म चार्ज नहीं लगा सकते।

क्यों जरूरी है?

केंद्र ने साफ किया कि 2016 में लॉन्च होने के बाद से UPI दुनिया का सबसे बड़ा रियल टाइम इंटरऑपरेबल पेमेंट सिस्टम बन गया है। यह पूरी तरह से भारत की अपनी शर्तों पर हुआ है। अकेले अगस्त 2026 में UPI ने 24।5 अरब ट्रांज़ैक्शन प्रोसेस किए।

नया फ़्रेमवर्क यह पक्का करता है कि ज्यादा कीमत वाले मर्चेंट ट्रांजैक्शन से मिलने वाले संसाधनों का इस्तेमाल छोटे व्यवसायों को मदद करने और पूरे देश में डिजिटल पेमेंट को मजबूत करने के लिए किया जाए।

 

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