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UPI शुल्क का पैसा किसके पास जाएगा? सरकार ने कर दिया क्लियर; 15 अक्टूबर से नियम लागू

Published: Fri, 25 Sep 2026 06:34 PM (IST)

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर MDR लगाने के फैसले को बाहरी दबाव का परिणाम होने से इनकार किया है।

वित्त मंत्री ने UPI MDR पर बाहरी दबाव के आरोप खारिज किए

वित्त मंत्री ने UPI MDR पर बाहरी दबाव के आरोप खारिज किए

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्ष के उन आरोपों को पूरी तरह से बेबुनियाद बताया है कि 2000 रुपये से ज्यादा के कुछ UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने का फैसला बाहरी दबाव में लिया गया था। उन्होंने कहा कि यह पेमेंट इकोसिस्टम को प्रोफेशनल बनाने के लिए लोया गया है।

समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत के दौरान, सीतारमण ने कहा कि यह फैसला पूरी तरह से प्रोफेशनल था और इसे नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI), पेमेंट बैंकों और मर्चेंट बैंकों ने मिलकर लिया था, न कि सरकार ने थोपा था।

उन्होंने कहा कि MDR कोई टैक्स नहीं है और यह सरकार के पास नहीं जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि विपक्ष मुद्दे ढूंढ रहा है और मामले को पूरी तरह समझे बिना आरोप लगा रहा है।

शुल्क का पैसा किसके पास जाएगा?

सीतारमण ने कहा, 'यह कोई टैक्स नहीं है, यह कोई सेस नहीं है और न यह सरचार्ज है। इससे इकट्ठा होने वाली रकम भारत के कंसोलिडेटेड फंड में नहीं जाएगी।' इकट्ठा की गई रकम UPI इकोसिस्टम में बैंकों और दूसरी संस्थाओं के बीच बांटी जाएगी।

इकट्ठा किए गए MDR का 40 प्रतिशत ग्राहकों के बैंकों को, 30 प्रतिशत पेमेंट गेटवे को, 20 प्रतिशत UPI ऐप को और बाकी 10 प्रतिशत UPI ऐप के स्पॉन्सर बैंक को जाएगा।

15 अक्टूबर से, 2000 रुपये से ज्यादा के पर्सन-टू-मर्चेंट UPI पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। यह चार्ज मर्चेंट यानी दुकानदार पर लगेगा, उपभोक्ता नहीं साथ ही 75,000 रुपये या उससे ज्यादा के ट्रांजक्शन के लिए यह ज्यादा से ज्यादा ज्यादा 300 रुपये होगा। लोगों के बीच होने वाले पेमेंट और रोजमर्रा के ज्यादातर मर्चेंट पेमेंट पहले की तरह मुफ्त रहेंगे।

किस पर कितना MDR?

रेलवे, टेलीकॉम, फ्यूल और इंश्योरेंस जैसी जरूरी सेवाओं के लिए 2000 रुपये से ज्यादा के हर ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये का फ़्लैट शुल्क लगेगा। कैपिटल मार्केट ट्रांजैक्शन (म्यूचुअल फंड, स्टॉक ब्रोकिंग) के लिए 0.02 प्रतिशत की कम दर लागू होगी, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी।

UPI QR कोड के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक का पेमेंट लेने वाले छोटे मर्चेंट किसी भी नए शुल्क से पूरी तरह मुक्त रहेंगे; इससे लगभग 96 प्रतिशत मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

15 सितंबर को जारी हुआ आदेश 

UPI प्लेटफॉर्म चलाने वाली संस्था NPCI ने 15 सितंबर को कुछ UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने के लिए एक सर्कुलर जारी किया था। इस कदम का मकसद डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के लिए रेवेन्यू का एक टिकाऊ इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है।

छोटे मर्चेंट द्वारा UPI के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए एक खास फंड बनाया जाएगा, जिसमें कुल MDR कलेक्शन का 5 प्रतिशत हिस्सा जमा किया जाएगा।

इस पहल से UPI का दायरा बढ़ेगा, इसके लगातार इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा और भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में छोटे व्यवसायों की भागीदारी तेजी से बढ़ेगी।

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