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UPI पेमेंट पर क्यों लगाया गया चार्ज? सरकार के जवाब के बाद नीति आयोग ने किया सबकुछ क्लियर

Published: Wed, 16 Sep 2026 07:24 PM (IST)Updated: Wed, 16 Sep 2026 07:27 PM (IST)

UPI पर चार्ज क्यों लगाए गए हैं, यह कितना जरूरी है और कितना नहीं? देशभर में UPI चार्ज को लेकर ...और पढ़ें

UPI चार्ज विवाद पर नीति आयोग।

UPI चार्ज विवाद पर नीति आयोग।

HighLights

  1. नीति आयोग ने यूपीआई चार्ज को आत्मनिर्भरता के लिए बताया जरूरी।

  2. शुल्क न्यूनतम रखने और उपभोक्ताओं पर बोझ न डालने की सलाह।

  3. 2000 रुपये से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर ही लगेगा चार्ज।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में डिजिटल पेमेंट का सबसे बड़ा माध्यम यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) पर लगाए गए चार्ज ने देशभर में एक नई बहस छेड़ दी है।

ऐसे में सरकार और विपक्ष के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब नीति आयोग ने इस पूरे मामले में अपना रुख साफ किया है। साथ ही यह भी बताया है कि आखिर UPI पेमेंट पर चार्ज क्यों लगाया गया है और ये जरूरी क्यों है?  

UPI चार्ज पर नीति आयोग ने क्या कहा?

इस पूरे मामले में नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने कहा है कि यूपीआई ट्रांजैक्शन पर एक छोटा सा चार्ज लगाने से इस डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को खुद के पैरों पर खड़े होने यानी 'सेल्फ-सस्टेनिंग' बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि इस शुल्क को न्यूनतम रखा जाना चाहिए ताकि आम उपभोक्ताओं पर इसका कोई बोझ न पड़े।

यूजर-पेज प्रिंसिपल' और कारोबारियों को फायदा

अशोक कुमार लाहिड़ी ने यूपीआई के लिए 'यूजर-पेज प्रिंसिपल' पर विचार करने की बात कही है। उनका तर्क है कि डिजिटल पेमेंट से केवल ग्राहक ही नहीं, बल्कि कारोबारी भी बड़े पैमाने पर लाभान्वित होते हैं। उन्होंने जोर दिया कि डिजिटल पेमेंट अपनाने से व्यापारियों को कैश संभालने के झंझट और चेक जमा करने में होने वाली लागत व असुविधा से छुटकारा मिलता है।

डिजिटल पेमेंट पर कैसा पड़ेगा असर?

इसके साथ ही जब उनसे यह पूछा गया कि क्या 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर चार्ज लगाने से भारत में डिजिटल पेमेंट के इस्तेमाल पर असर पड़ेगा? तो उन्होंने जवाब दिया कि कोशिश यह होनी चाहिए कि चार्ज को जितना संभव हो उतना कम रखा जाए, लेकिन इसे लगाया जाना चाहिए ताकि यूपीआई एक आत्मनिर्भर बिजनेस बन सके।

बिलडेस्क के सह-संस्थापक श्रीनिवासू एमएन के क्या तर्क हैं?

वहीं इस चार्ज विवाद को लेकर डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म 'बिलडेस्क' के निदेशक और सह-संस्थापक श्रीनिवासू एमएन ने भी इस चर्चा पर अपना विचार रखा। उन्होंने कहा कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों के भारी निवेश के कारण ही आज यूपीआई आम लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है।

500 मिलियन यूजर्स का दायरा

श्रीनिवासू ने बताया कि भारत में यूपीआई उपयोगकर्ताओं की संख्या 500 मिलियन को पार कर चुकी है। जैसे-जैसे सिस्टम का विस्तार हो रहा है, फ्रॉड से सुरक्षा और ग्राहकों को जागरूक करने जैसी नई तकनीकों में और निवेश की जरूरत है।

किसे देना होगा चार्ज?

श्रीनिवासू ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित यूपीआई चार्ज आम उपभोक्ताओं या छोटे व्यापारियों के छोटे लेन-देन पर लागू नहीं होगा। यह शुल्क केवल 2000 रुपये से ऊपर के चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लगेगा। साथ ही, यूटिलिटी बिल, सरकारी टैक्स, बीमा और ईंधन के बिल जैसे नियमित भुगतानों पर विशेष रियायतें दी जाएंगी।

इसके अलावा, मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का एक हिस्सा एक समर्पित फंड में दिया जा सकता है, जिसका उपयोग छोटे व्यापारियों के बीच यूपीआई के विस्तार में मदद के लिए किया जाएगा।

निर्यात को लेकर भी नीति आयोग की सलाह

गौरतलब है कि इस चर्चा के दौरान नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने भारतीय निर्यात और वैश्विक बाजारों को लेकर भी अहम बात कही। अमेरिका जैसे प्रमुख बाजारों में अनिश्चितता के बीच, उन्होंने कहा कि भारतीय कारोबारियों को खुद ही नए बाजारों की तलाश करनी चाहिए।

लाहिड़ी ने जोर दिया कि दुनिया बहुत बड़ी है और अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, पूर्वी एशिया तथा ऑस्ट्रेलिया जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं। व्यापारियों को यह खुद तय करना चाहिए कि उनके उत्पादों की मांग कहां है, इसके लिए उन्हें सरकार के भरोसे नहीं बैठना चाहिए।

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