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69000 शिक्षक भर्ती मामला: आरक्षण का लाभ लिया तो अन-रिजर्व्ड सीट पर दावा कैसा? सुप्रीम कोर्ट में सामान्य वर्ग की दलील

Published: Wed, 16 Sep 2026 10:09 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट में 69000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में सामान्य वर्ग ने दलील दी कि आरक्षण का लाभ लेने के बाद आरक्षित वर्ग सामान्य श्रेणी में नहीं जा सकता।

आरक्षण लाभ के बाद सामान्य वर्ग में माइग्रेशन संभव नहीं

आरक्षण लाभ के बाद सामान्य वर्ग में माइग्रेशन संभव नहीं

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में 69000 सहायक शिक्षकों की भर्ती मामले में सामान्य वर्ग के नौकरी कर रहे सहायक शिक्षकों की ओर से दलील दी गई कि एक बार आरक्षण का लाभ लेने के बाद आरक्षित वर्ग अधिक अंक लाने पर भी सामान्य वर्ग में नहीं जा सकता।

अभ्यर्थियों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील शोभा गुप्ता ने कहा कि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को इस भर्ती में आयु, फीस और अंकों में छूट दी गई है यह छूट नहीं बल्कि आरक्षण की श्रेणी में आता है।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर हाई कोर्ट की खंडपीठ का 13 अगस्त 2024 का फैसला लागू होता है तो छह साल से इस भर्ती के तहत नौकरी कर रहे करीब 10 हजार चयनित शिक्षक नौकरी से बाहर हो जाएंगे। मामले में 22 सितंबर को फिर सुनवाई होगी। मामले की सुनवाई एसवीएन भट्टी और एनवी अंजारिया की पीठ कर रही है।

आरक्षण लाभ के बाद सामान्य वर्ग में माइग्रेशन संभव नहीं

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में मामले पर बहस हुई जिसमें चयनित और नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों की ओर से पक्ष रखा गया। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता और राकेश मिश्रा पेश हुए।

शोभा गुप्ता ने कहा कि यहां सवाल है कि आरक्षित वर्ग के जिन लोगों ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान आरक्षित वर्ग के तौर पर छूट ली है क्या वे अधिक अंक आने पर अनारक्षित वर्ग की रिक्तियों पर नियुक्ति पा सकते हैं।

गुप्ता ने कहा कि जिन्होंने आरक्षित वर्ग को मिलने वाली छूट ली है वे अनारक्षित वर्ग यानी सामान्य वर्ग में माइग्रेट किये जाने का दावा नहीं कर सकते।

इस बारे में सुप्रीम कोर्ट के चार फैसले हैं, दीपा ईवी बनाम भारत सरकार, गौरव प्रधान बनाम राजस्थान राज्य, दिल्ली सरकार बनाम प्रदीप कुमार एवं अन्य तथा भारत सरकार बनाम जी. किरन का फैसला इस मुद्दे को पूरी तरह कवर करता है।

उन्होंने वर्तमान विवाद से संबंधित भर्ती प्रक्रिया और विवाद का सिलसिलेवार ब्योरा कोर्ट में दिया। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किलों का सही चयन हुआ है। उन्होंने यह साबित करने के लिए कि ज्यादातर सीटें आरक्षित वर्ग के हिस्से में जा रही हैं, कोर्ट में आंकड़े भी पेश किये।

सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को

गुप्ता ने कहा कि आरक्षित वर्ग का कहना है कि उन्होंने भले ही पहले छूट ली हों लेकिन अगर उन्होंने सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा में 65 प्रतिशत या उससे अधिक अंक अर्जित किये हैं तो ऐसे मेधावियों को 1994 के अधिनियम की धारा 3(6) के तहत सामान्य वर्ग में माना जाए।

इतना ही नहीं इसके बाद जिला आवंटन के समय फिर उन्हें आरक्षित वर्ग का माना जाए यानी वे सुविधानुसार आरक्षित और अनारक्षित वर्ग का लाभ लेना चाह रहे हैं।

शुरुआत में आरक्षित वर्ग के वकीलों ने भी पक्ष रखना चाहा लेकिन कोर्ट ने कहा कि वह सभी पक्षों को सुनेगा और जो नियमानुसार सही होगा वही करेगा। मामले में दोपहर तक बहस हुई और भोजनावकाश के बाद इस मामले की सुनवाई नही हो पाई और कोर्ट ने अगली तारीख 22 सितंबर को तय कर दी।

इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को सामान्य वर्ग के चयनित अभ्यर्थियों ने चुनौती दी है। याचिका में हाईकोर्ट की खंडपीठ के 13 अगस्त 2024 के आदेश को रद करने की मांग की गई है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 69000 शिक्षक भर्ती में बनाई गई मेरिट लिस्ट रद कर दी थी और तीन महीने में नई मेरिट लिस्ट बनाने का आदेश दिया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने शुरुआती सुनवाई में ही हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

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