नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। शोध को बढ़ावा देने में जुटी सरकार अब विश्वविद्यालयों शिक्षकों को सेवानिवृत्ति के बाद भी शोध से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने का मौका देगी। उन्हें यह मौका सेवानिवृत्ति के बाद और तीन साल या 68 वर्ष आयु तक ही मिलेगा। इस योजना में राज्य विश्वविद्यालयों और कालेजों के साथ केंद्रीय विश्वविद्यालयों के शिक्षक भी शामिल हो सकेंगे। अब तक इसमें सिर्फ राज्य विश्वविद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षक ही शामिल हो सकते थे।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने शोध को बढ़ावा देने के लिए बेसिक साइंस रिसर्च फैकेल्टी फेलोशिप स्कीम में बड़ा बदलाव किया है। इसके तहत सेवानिवृत्ति के बाद भी शोध के लिए आवेदन करने वाले शिक्षकों को पूरी मदद की जाएगी।

उन्हें नजदीकी संस्थानों की प्रयोगशाला में काम करने की छूट मिलेगी। यूजीसी का मानना है कि इससे संस्थानों में शोध का बेहतर माहौल पैदा होगा। वैसे भी उच्च शिक्षण संस्थानों को विश्वस्तरीय बनने के लिए ज्यादा से ज्यादा शोध कार्यो का होना जरूरी है। विश्वस्तरीय संस्थान के लिए यह सबसे बड़ा मानक होता है।

यूजीसी के मुताबिक, फिलहाल विश्वविद्यालय और कालेजों के शिक्षक 58 से 62 वर्ष के बीच सेवानिवृत्त हो जाते हैं, जबकि यह ऐसा समय होता है जब शोध की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और बढ़ावा देने में उनका अनुभव काफी अहम हो जाता है।

ऐसे में केंद्रीय विश्वविद्यालय और राज्य विश्वविद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को फिर से शोध कार्यो से जोड़ने की पहल की गई है। हाल ही में शिक्षकों की कमी को देखते हुए यूजीसी ने विश्वविद्यालयों से सेवानिवृत्त हो चुके शिक्षकों की सेवाएं लेने के निर्देश दिए थे।

50 हजार से पांच लाख रुपये तक की दी जाती है मदद

विश्वविद्यालय शिक्षकों को शोध से जुड़ी गतिविधियों से जोड़ने के लिए यह योजना शुरू की गई थी। इसके तहत शिक्षकों को 50 हजार से पांच लाख रुपये तक की मदद भी दी जाती है।

Posted By: Nitin Arora