जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली: देश में कोयले की किल्लत से उत्पन्न बिजली संकट की स्थिति में अभी तो कुछ सुधार दिख रहा है लेकिन केंद्र सरकार मानसून के समय में ऐसे हालात फिर पैदा होने की संभावना से चिंतित है। बिजली मंत्री आर के सिंह ने एक बार फिर सभी राज्यों को पत्र लिखा है कि वो अभी से कोयला आयात करने की कवायद शुरू कर दें ताकि मानसून व उसके बाद की स्थिति में घरेलू कोयला में मिश्रण करने के लिए पर्याप्त स्टाक रहे।

केंद्र ने राज्य सरकारों को उनके बिजली संयंत्रों में और निजी बिजली कंपनियों को कहा है कि वो घरेलू कोयला में 10 फीसद तक आयातित कोयला मिलाने के लिए बाहर से कोयला मंगवायें। बिजली मंत्री ने राज्यों से कहा है कि अगर अभी से पर्याप्त तैयारी नहीं की गई तो मानसून में फिर से बिजली प्लांटों के पास कोयले की कमी पैदा हो सकती है।

उन्होंने हरियाणा, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल को खास तौर पर कहा है कि उनकी तरफ से या तो कोयला आयात की प्रक्रिया ही नहीं शुरू की गई या फिर प्रक्रिया की रफ्तार धीमी है। इन राज्यों ने हाल के महीनों में कोयला संकट का सबसे ज्यादा रोना रोया था। हरियाणा के मुख्यमंत्री ने जो दिल्ली जा कर बिजली मंत्री से मुलाकात भी की थी।

अपने पत्र में बिजली मंत्री ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि अगर ये राज्य केंद्र के निर्देश के मुताबिक कोयले का स्टाक नहीं उठाया तो उन्हें जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कोयला नहीं दिया जाएगा और उनके हिस्से का कोयला दूसरे राज्यों को आवंटित कर दिया जाएगा। बिजली मंत्री ने कहा है कि राज्यों को 31 मई, 2022 तक कोयला आयात करने का आर्डर देना होगा ताकि 30 जून तक 50 फीसद कोयला आयात किया जा सके।

31 अगस्त, 2022 तक 40 फीसद तक कोयला आ सके और 31 अक्टूबर तक 10 फीसद कोयला आयात हो सके। इस फार्मूले के बीच का गणित यही है कि मानसून में जब कोयला आपूर्ति बाधित होती है तो राज्यों के पास पर्याप्त कोयला स्टाक रहे। ताप बिजली संयंत्रों की कुल जरूरत का 88 फीसद कोयला घरेलू स्तर पर प्राप्त होता है। बिजली मंत्रालय ने सभी बिजली कंपनियों और राज्य सरकारों को कहा है कि वो पर्याप्त कोयला स्टाक रखने के लिए हरमुमकिन कदम उठाएं।

Edited By: Amit Singh