'UGC जाति आधारित भेदभाव कर रही है...', नए नियम के खिलाफ SC में एक और याचिका; पढ़ें क्या है मांग
UGC Controversy: यूजीसी के नए नियमों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता विनीत जिंदल ने आरोप लगाया ...और पढ़ें

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन (UGC) के नए नोटिफिकेशन को लेकर विवाद शुरू हो गया है। ये मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। सर्वोच्च न्यायालय में UGC की नई गाइडलाइंस को चुनौती देते हुए जाति आधारित भेदभाव का आरोप लगाया गया है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि ने कुछ चुनिंदा जातियों को संस्थागत संरक्षण से बाहर रखा है, जो समावेशी विकास की परिभाषा से बिल्कुल विपरीत है।
UGC ने हाल ही में एक नया नोटिफिकेशन जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के अनुसार, नोटिफिकेशन के नियम 3(सी) के तहत UGC अनारक्षित अभ्यार्थियों और शिक्षकों को संरक्षण देने में नाकामयाब साबित हुआ है।
याचिका में UGC पर लगाए गंभीर आरोप
विनीत जिंदल नाम के व्यक्ति ने UGC के इन नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आवाज उठाई है। विनीत का आरोप है कि UGC जाति आधारित भेदभाव कर रही है।
UGC की परिभाषा में जाति आधारित भेदभाव सिर्फ SC, ST और OBC श्रेणी के साथ ही होता है और जनरल कैटेगरी वाले अभ्यार्थियों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है। जबकि सच ये है कि जनरल वर्ग के अभ्यार्थियों को भी जाति के आधार पर परेशानी का सामना करना पड़ता है।
याचिका में की गई मांग
विनीत जिंदल ने अपनी याचिका में केंद्र सरकार और UGC को अंतरिम आदेश देने की मांग की है कि सभी अभ्यार्थियों के लिए समान अवसर के केंद्र, समान हेल्पलाइन नंबर और लोकपाल तंत्र का गठन किया जाए। साथ ही जातिगत भेदभाव की परिभाषा पर पुनर्विचार करने जरूरत है।
क्या है UGC के नए नियम?
यूजीसी की ओर से ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम 2026′ (Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026) लाया गया है। इसके तहत 4 मुख्य आदेश दिए गए हैं।
- हर यूनिवर्सिटी/ कॉलेज में Equity Committees और Equity Squads का गठन होगा।
- सभी संस्थानों में 24x7 हेल्पलाइन और शिकायत प्रणाली स्थापित की जाएगी।
- SC और ST वर्ग के अभ्यार्थियों को संस्थान में सुरक्षित माहौल प्रदान किया जाएगा।
- नियमों का उल्लंघन करने वालों की मान्यता रद होगी या फिर उनके फंड पर रोक लगा दी जाएगी।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
